परिवार की गुहार : मोदी सरकार विंग कमांडर अभिनंदन की तरह उनके बेटे को भी वतन वापस लाए

देहरादून : कश्मीर के गुलमर्ग में तैनात देहरादून निवासी सेना में हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी के बर्फ में फिसलकर पाकिस्तान सीमा में पहुंचने की खबर है। इस खबर से जवान के परिवार और गांव में कोहराम मच गया है। हर पल अनहोनी की आशंका से आंसू थम नहीं रहे हैं। जवान की पत्नी ने बताया कि सेना के यहां से आए फोन में बताया गया कि उनके पति की तलाश की जा रही है। वहीं जवान का परिवार चाहता है कि सरकार विंग कमांडर अभिनंदन की तरह उनके बेटे को अपने वतन वापस लाने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाए।

केंद्र सरकार विंग कमांडर अभिनंदन की तरह उनके भाई को भी लाए-भाई

अब परिवार हर पल राजेंद्र के लौटने का इंतजार कर रहा है। फोन पर बजने वाली हर घंटी राजेंद्र की खुशखबरी का अहसास तो कराती है, लेकिन मन में किसी अनहोनी की आशंका भी बनी हुई है।
हवलदार राजेंद्र के भाई कुंदन का कहना है कि वह चाहते हैं कि केंद्र सरकार विंग कमांडर अभिनंदन की तरह उनके भाई को भी बचाने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाए और जैसे भी हालत में उनका भाई है वापस लाएं।
पिता को कहा गया- बेटे को लगी है चोट, दून पहुंचकर पता लगी सच्चाई 
पिता ने बताया कि वो बाकी बेटों के साथ गांव रहते हैं उन्हें फोन कर सूचना दी गई कि उनके बेटे को चोट लगी है. जिसके बाद वो देर रात देहरादून पहुंचे और दून घर आकर मालूम चला कि असल में क्या हुआ है। पिता बेटे के लापता होने से आहत हैं. बूढ़ा पिता आस लगाए बैठा है कि जल्द उसका बेटा वापस लौट आएगा.
कश्मीर के गुलमर्ग में बर्फीले इलाके में तैनात थे राजेंद्र, तीन बच्चों के पिता हैं

मिली जानकारी के अनुसार देहरादून में अंबीवाला सैनिक कॉलोनी निवासी राजेंद्र सिंह नेगी ने वर्ष 2002 में 11 गढ़वाल राइफल्स ज्वाॅइन की थी। जो की अक्टूबर में एक महीने की छुट्टी लेकर देहरादून घर आए थे औऱ  नवंबर में वापस ड्यूटी में लौट गए थे। जवान के तीन बच्चे हैं।वह कश्मीर के गुलमर्ग में बर्फीले इलाके में तैनात थे। वहीं बच्चे बार-बार टीवी चैनल देख रहे हैं कि कब पिता के मिलने की खबर चलेगी। राजेंद्र के बचपन के दोस्त भी उसके परिवार को दिलासा देने के लिए उनके घर पहुंचे. बच्चों का रो रोकर बुरा हाल है.राजेंद्र के परिवार वाले, पड़ोसी और गांव के, क्षेत्र के लोग उसके वापस आने की दुआ कर रहे हैं।

8 जनवरी को किया था पत्नी को फोन, 1-2 दिन फोन नहीं कर पाया तो मेरी चिंता मत करना

वहीं जानकारी में हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी की पत्नी राजेश्वरी देवी ने बताया कि राजेंद्र ने आखिरी बार 8 जनवरी को फोन किया था। थोड़ी सी बातचीत में राजेंद्र सिंह ने कहा कि यहां गुलमर्ग में भारी बर्फबारी हो रही है और यहां जनरेटर भी खराब है अगर 2-3 दिन फोन नहीं कर पाया तो मेरी चिंता मत करना। वहीं इसी के साथ राजेंद्र सिंह ने अपने पैतृक गांव पजियाणा मल्ला में अपनी मां को भी फोन किया था और कहा था कहा कि वह बहन के साथ देहरादून घूमकर आ जाए। इसके बाद राजेंद्र सिंह का फोन नहीं आया।

जवान को आधुनिक हथियारों का काफी ज्ञान

मिली जानकारी के अनुसार 40 साल के राजेंद्र सिंह 2001 में लैंसडौन में सेना में भर्ती हुए जो कि अलग-अलग पोस्टों पर तैनात रहे। अप्रैल 2019 तक वह देहरादून के गढ़ीकैंट में तैनात रहे, जिसके बाद उन्हें गुलमर्ग भेजा गया। राजेंद्र सिंह ने आर्मी से जुड़े काफी कोर्स किए हैं, जिस कारण उन्हें आधुनिक हथियारों का भी ज्ञान है। इसलिए उन्हें वर्तमान में पोस्ट इंचार्ज की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

पिता के वापस लौटने की दुआ कर रही बेटी

जानकारी मिली है कि हवलदार राजेंद्र चार भाई है जिसमे से तीन भाई मजदूरी करते हैं। वो अकेले ही सरकारी नौकरी कर रहे हैं और घर के इकलौते कमाने वाले हैं। जवान के पिता रतन सिंह नेगी भी घर में खेतीबाड़ी का काम करते हैं। उन्होंने 2015 में अंबीवाला स्थित सैनिक कॉलोनी प्रेमनगर में अपना घर बनाया था और परिवार वहीं रह रहा था. बेटी आईएमए केवी स्कूल मे पढ़ाई कर रही है और बस पिता के सही सलामत होने और वापस आने की दुआ कर रही है।

 

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