आपदा प्रबंधन विभाग में संविदा पर फर्जी नियुक्ति! सरकार पर लगा गंभीर आरोप

देहरादून : उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष इंजीनियर हरीश चंद्र पाठक ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी को पत्र लिखकर शिकायत की है कि आपदा प्रबंधन विभाग में संविदा कार्मिक डॉ. के.एन. पान्डे जो 31 जुलाई 2019 को सेवानिवृत्त हो गये थे, की फर्जी पुनर नियुक्ति की गई है, इस दौरान उक्त संविदा कार्मिक को 1,37,000 महीना वेतन दिया जा रहा है। हरीश चंद्र पाठक ने संविदा कार्मिक डा. केएन पान्डे की पुनः नियुक्ति को नियम विपरीत बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने कार्मिक विभाग द्वारा 27 अप्रैल 2018 को जारी किए गए शासनादेश का उल्लंघन करके उक्त संविदा कार्मिक को पुनः नियुक्ति प्रदान की है.

कार्मिक विभाग के शासनादेश के अनुसार 27 अप्रैल 2018 के बाद से किसी भी विभाग में किसी भी कार्मिक की संविदा या आउट सोर्स में नियुक्ति या फिर पुनर नियुक्ति कार्मिक विभाग की अनुमति के बिना नहीं की जा सकती है, यदि कार्मिक विभाग की अनुमति के बिना कोई विभाग किसी भी कार्मिक की संविदा या आउट सोर्स में नियुक्ति करता है तो उक्त कार्मिक को नियुक्ति प्रदान करने वाले अधिकारी से उस कार्मिक को दिए जा रहे वेतन की वसूली की जाये। पाठक ने यह भी आरोप लगाया कि आपदा प्रबंधन विभाग ने इस पुनर नियुक्ति को करने में नियमों की अनदेखी की है, अपने पत्र में आरोप लगाया कि कार्मिक विभाग के शासनादेश के अनुसार किसी भी संविदा कर्मचारी की पुनर नियुक्ति का प्रावधान नहीं है. इसके बावजूद भी संविदा कार्मिक को पुनर नियुक्ति प्रदान की है।

यह भी आरोप लगाया कि डॉक्टर के एन पांडे की पुनर नियुक्ति कार्मिक विभाग से अनुमति लिए बिना ही की गई है. कार्मिक विभाग के शासनादेश के अनुसार यदि किसी कार्मिक की पुनर नियुक्ति होती है, तो उसको पहले प्राप्त होने वाले वेतन का केवल 40% ही वेतन पुनर नियुक्ति के उपरांत दिया जाता है। आपदा प्रबंधन विभाग डॉ. केएन पांडे को रुपए 137000 प्रतिमाह वेतन दे रहा है पुनर नियुक्ति से पहले भी उनको इतना ही वेतन दिया जा रहा था। उनका कहना  है कि डॉ. के. एन. पान्डे को दिये जा रहे वेतन का निर्धारण आपदा प्रबंधन विभाग ने वित्त विभाग से नहीं करवाया है, इसका मतलब साफ है कि आपदा प्रबंधन विभाग ने वित्त विभाग की अनुमति लिए बिना ही डॉ. के. एन. पांडे को रुपए 137000 प्रतिमाह वेतन स्वयं स्वीकृत किया है। यह कार्मिक विभाग और वित्त विभाग के शासनादेशों का उल्लंघन है और नियम विपरीत है। एक तरफ तो सरकार कर्मचारियों के वेतन देने के लिए प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपए का कर्ज ले रही है और दूसरी तरफ विभागीय अधिकारी अपने खासम खास लोगों को इस प्रकार नियम विपरीत लाखों रुपय महीना वेतन देकर राज्य का कर्ज में लिया हुआ धन लुटा रहे हैं।

पाठक ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि एक तरफ तो राज्य सरकार राज्य में सभी विभागों में 50 की उम्र पार कर चुके कार्मिकों पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति लागू कर रही है और दूसरी तरफ आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी अपने खासम खास संविदा कर्मचारियों को फर्जी पुनर नियुक्ति प्रदान करके 60 साल के बाद भी उन्हें लाखों रुपया प्रतिमाह वेतन देकर राज्य को चूना लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि डा. पांडे की पुनर नियुक्ति नियम विपरीत की गई है इसलिए कार्मिक विभाग के शासनादेश 27 अप्रैल 2018 के अनुसार डॉ.  पांडे को पुनः नियुक्ति प्रदान करने वाले अधिकारी से उनको अब तक छह माह में दिए गए कुल वेतन 822000 की वसूली  की जानी चाहिए।

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