Exclusive : उत्तराखंड शिक्षा विभाग पेश कर रहा है अनूठी मिसाल, लापरवाही करो और देहरादून में पोस्टिंग पाओ

देहरादून ( मनीष डंगवाल) : उत्तराखंड का शिक्षा विभाग बेहतर शिक्षा या गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के लिए कम और अजीबों गरीब कारनामों के लिए ज्यादा जाना जाता है…जी हां उत्तराखंड का शिक्षा विभाग प्रदेश का एक ऐसा विभाग है जो अपने विभाग के साथ अन्य विभागों के अधिकारियों की लापरवाही के लिए रोल मॉडल बनने जा रहा है। ये रोल मॉडल किसी और चीज को लेकर नहीं बल्कि अधिकारियों के असंतुष्ट कार्यों पर ईनाम देने के लिए रोल मॉडल बन रहा है।

शिक्षा विभाग में अधिकारियों को लापरवाही के मामलों में सजा की बदले इनाम मिलता है। जीं हा आप सोच रहे होंगे कि ये हम ऐसे ही कर रहे हैं लेकिन शिक्षा विभाग में एक दो नहीं बल्कि कई ऐसे मामले हैं जहां अधिकारियों को लापरवाही पर सजा के बदले ऐसे तौहफे मिले हैं, जो उत्तराखंड का हर अधिकारी चाहता है और वह तोहफा देहरादून में रहने का है। अधिकतर अधिकारियों की चाह होती है कि वह राजधानी में सुख सुविधाएं भोगते हुए देहरादून में ही अपनी सेवाएं दें,यहां तक कि कई अधिकारियों  को उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सेवांए देना सजा के रूप में लगता है इसलिए ज्यादातर अधिकारी देहरादून में रहना चाहते हैं। लेकिन शिक्षा विभाग में अपनी पहुंच के नाते निकमे अधिकारी मनचाही पोस्टिंग पा रहे हैं।

आरडी शर्मा पर मेहरबानी की तैयारी

उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार ने साफ तौर से ऐलान किया है कि जो अधिकारी या कर्मचारी कमचोर हैं। उन्हें सरकार अनिवार्य सेवानिवृत देकर घर बिठा देगी,जिसको लेकर सभी विभागों में छटनी की प्रक्रिया भी चल रही है। वहीं उत्तराखंड के शिक्षा विभाग की बात करें तो यहां के लिए लगता है दूसरे नियम और कानून बने हैं। अब बात आरडी शर्मा की कर लेते हैं जो वैसे तो शिक्षा विभाग सयुंक्त निदेशक के पर तैनात हैं लेकिन आरडी शर्मा की दिलचस्पी अपने मूल विभाग में कम और एससीईआरटी में ज्यादा रहती है।

बताया जा रहा है कि अपने काम को लेकर कम और विवादों में रहकर ज्यादा सुर्खियां बटोरने वाले आरडी शर्मा को हरिद्धार मुख्य शिक्षा अधिकारी की भूमिका का सही तरह से निर्वहन न कर पाने का इनाम मिलने जा रहा है, वह भी राजधानी देहरादून में…एससीईआरटी के अपर निदेशक के रूप में।

सूत्र की मानें तो आरडी शर्मा एससीईआरटी के अपर निदेशक बनाएं जाने की पूरी तैयारी हो चुकी है, फाइल मुख्यमंत्री तक पहुंच गई है…फाइल पर मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर होते ही आरडी शर्मा को नए साल का तोहफा सरकार की तरह से मिल जाएगा। लेकिन एससीईआरटी के कर्मचारियों के बीच ये बात चर्चा का विषय बना हुई है कि आखिर जीरो टोलरेंस की सरकार में सरकार ऐेसे अधिकारियों को प्रमोट क्यों रही है जो अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं। आरडी शर्मा पहले भी एससीईआरटी में संयुक्त निदेशक पद पर रह चुके हैं लेकिन शिक्षा मंत्री अरविंद पाण्डेय ने मई 2017 में उनका तबदला हरिद्धार मुख्यशिक्षा अधिकारी के पद पर कर दिया था लेकिन सरकार के आदेश के बाद भी आरडी शर्मा हरिद्धार जिले के मुख्यशिक्षा अधिकारी नहीं बनना चाहते थे, तब मीडिया में खबर चलने के बाद आरडी शर्मा को मजबूरी में मुख्य शिक्षा अधिकारी का पद संभालना पड़ा, लेकिन आरडी शर्मा का मन हरिद्धार में लगा नहीं और पूरी तन्मयता के साथ उन्होने काम किया नहीं। हरिद्धार जिले के मुख्यशिक्षा अधिकारी से काम लेना विभाग को भारी पड़ रहा था,लिहाजा विभाग से उन्हेंं हरिद्धार से एससीईआरटी में अटैच कर दिया,लेकिन अटैचमेंट में भी गजब का खेल है।

अमूमन देखा जाता है कि जिस विभाग के अधिकारी को जो जिम्मेदारी मिली होती है, वह उस पर खरा न उतर पा रहा हो तो उसे उसी विभाग में मुख्यालय से अटैच किया जाता है,लेकिन आरडी शर्मा ने अपना अटैचमेंट एससीईआरटी में कर दिया। रामनगर बोर्ड में भी अपनी सेवाओं को लेकर आरडी शर्मा चर्चाओं में रहे और 2017 जनवरी में पूर्व शिक्षा मंत्री प्रसाद नैथानी ने उन्हेध रामनगर बोर्ड से देहरादून बुला लिया। बताया जाता है कि आरडी शर्मा अपने काम को लेकर कम और लापरवाही को लेकर ज्यादा पहचाने जाते हैं।

विभाग के लिए ये भी उदाहरण

शिक्षा विभाग में अब एक कहावत बन गई है कि बेहतर काम करने की बजाय कामचोरी करो तो विभाग में अच्छी जगह सेवा करने के लिए मिल जाती है। ऐसे में हम आपको कई उदाहरण दे रहे हैं जिनपर विभाग को कार्रवाई करने के साथ ही ऐसे जगह सेवा करने के लिए भेजना चाहिए था,जिन्हें लगे कि उन्होने कुछ तो गलत किया है जो उनकी पोस्टिंग प्रदेश के ऐसी जगह हो रही है जहां सेवाएं देना वास्तव में चुनौती है। विभागीय कार्यों में लापरवाही का इन्हे भी मिला इनाम।
लीलाधर व्यास – लीलाधर व्यास इस समय डीजी कार्यालय में ज्वाइंट डारेक्टर के पद पर तैनात हैं, लेकिन उत्तरकाशी में मुख्यशिक्षा अधिकारी के पद पर रहते हुए गेस्ट टीचरों की नियुक्ति में घपले के आरोप में लीलाधर व्यास को हटाया गया था,लिहाज उन पर कार्रवाई करने की बजाय विभाग ने उन्हे देहरादून में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर तैनाती दे दी।
वीएन सिंह – अल्मोड़ा में मुख्यशिक्षा अधिकारी के पद पर रहते हुए अशासकीय स्कूलों में नियुक्ति करने के मामले में शिक्षा मंत्री की नाराजगी के चलते वीएन सिंह को अल्मोड़ा मुख्यशिक्षा अधिकारी के पद से हटाया गया लेकिन वीएन सिंह के लिए ये नाराजगी उनके लिए तौहफे के रूप में आई और वीएन सिंह इस समय बेसिक शिक्षा में ज्वाइंट डारेक्टर के पद पर तैनात हैं।
चंद्रपाल यादव – चंद्रपाल यादव पौड़ी जनपद के डीओ माध्यमिक पद पर रहते पैंस के लेने देन के मामले एक विडियों वायरल होने के बाद चर्चाओं में आए,शिक्षा विभाग ने कार्रवाई तो की लेकिन इनाम के तौर पर पोस्टिंग देहारादून शिक्षा निदेशालय में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर कर दी।

इन तमाम मामला को लेकर जब हमने शिक्षा विभाग से जुड़े कई अधिकारी और कर्मचारियों से बात की तो सब की प्रतिक्रिया यहीं थी कि शिक्षा विभाग में तो ये कहावत बन गई है कि लापरवाही करों और इनाम के तौर पर पोस्टिंग देहरादून में पाओ। शिक्षा में 4 जिलों में मुख्यशिक्षा अधिकारियों के पद खाली हैं। विभाग को वह खाली पद नजर नहीं आ रहे हैं लेकिन एससीईआरटी अपर निदेशक का पद खाली है, वो जरूर नजर आ रहा है कि कैसे उसे भरा जाएं।

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