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मिसाल: ग्रामीणों ने खुद बिछा दी 1 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन, हर परिवार ने दिए 15 हजार

breaking uttrakhand newsअल्मोड़ा: सरकार विकास का दावा करती है। पेयजल को लेकर सरकारी दस्तावेजों में बड़ी-बड़ी योजनाएं हैं, लेकिन धरातल उर सरकार के दावों और योजनाओं की कहीकत कुछ और ही है। अल्मोड़ा के ताड़ीखेत के सुनियाकोट के ग्रामीण दशकों से पेयजल लाइन बिछाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन गांव में आज तक पेयजल लाइन नहीं बिछाई जा सकी। जन प्रतिनिधियों से लेकर आला अधिकारियों तक हर किसी से गुहार लगाई, लेकिन किसीने नहीं सुनी।

ग्रामीणों ने हार नहीं मानी। उन्होंने सरकार के भरोसे रहने के बजाय सिस्टम को आईना दिखाने की ठानी और खुद ही पाइप लाइन बिछाने में जुट गए। गांव वालों ने सामुहिक प्रयासों से पैसे जमा किये। खुद श्रमदान किया। और गांव तक पानी पहुंचा दिया। पीएम मोदी की 2020 की पहली मन की बात कार्यक्रम में इसका जिक्र भी किया। उन्होंने ग्रामीणों की जमकर तारीफ भी की।

गांव के 40 परिवारों ने पैसे जाम किये। प्रत्येक परिवार से हर सदस्य के श्रमदान से मात्र दो महीने में एक किमी दूर गधेरे से गांव में पानी पहुंचाया गया। खुद ही वहां टैंक भी बनाया और एक मोटर भी लगाई। जिससे हर समय पानी उपलब्ध हो सके। पेयजल को गांव तक पहुंचने में छह लाख खर्चा आया। इस काम के लिए गांव के प्रत्येक परिवार ने 15 हजार रुपये की मदद की।

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