हर कोई पूछ रहा है, बेटी क्यों नहीं जन्मी ? सीएम ने दिए जांच के आदेश

देहरादून: उत्तरकाशी जिले के 133 गांवों में हुए प्रसव में सामने आए चैंकाने वाले तथ्यों के बाद सरकार भी सकते है। सरकार ने पूरे मामले को लेकर उत्तरकाशी डीएम को जांच के आदेश दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नारे की पोल उत्तरकाशी के प्रकरण ने खोलकर रख दी। उत्तरकाशी जिले में पिछले तीन माह में 133 गांवों में 216 बच्चे पैदा हुए है। हैरानी की बात ये है कि इन बच्चों में एक भी बेटी ने जन्म नहीं लिया। जिसके बाद शासन-प्रशासन सब सकते में हैं कि आखिर उत्तरकाशी में ऐसा क्यों हो रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मामले की वस्तुस्थिति जानने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस मामले को काफी गंभीर माना है और इसकी तह तक जाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

सरकार के दावों की खुली पोल

जानकारों के मुताबिक उत्तरकाशी में जो तस्वीर उभर रही है वो सरकार के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ समेत तमाम अभियानों की कलई खोलती दिख रही है। साथ ही सरकार के ‘कन्या भ्रूण हत्या निषेध’ को लेकर चलाए जा रहे जागरुकता अभियान को भी मुंह चिढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से लिंगानुपात में और सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन उत्तरकाशी में बिगड़ते लिंगानुपात के जो चैंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। उन आंकड़ों ने ऐसे तमाम अभियानों को झुठला दिया है।

मंत्री बोलीं कुछ तो गड़बड़ है

उत्तराखंड की महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य ने इस मामले को काफी गंभीरता से लिया है। उन्होंने इसकी जांच कराने की बात कही है। रेखा आर्य ने कहा कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं का परीक्षण कराया जाना जरूरी है। रेखा आर्य ने कहा कि मामले में कहीं ना कहीं कुछ गड़बड़ी जरूर है। ये प्रकृति के साथ खिलवाड़ है और जांच के बाद सारा मामला साफ हो जाएगा। अगर कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डीएम करेंगे जांच

सरकारी आंकड़ों में इस भयावह स्थिति का खुलासा होने पर हरकत में आए जिला प्रशासन ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग सभी जिलों के हर गांव में होने वाले संस्थागत एवं घरेलू प्रसवों का ब्यौरा तैयार करता है। बीते अप्रैल से जून के बीच उत्तरकाशी जिले के विभिन्न गांवों में हुए प्रसव की रिपोर्ट सामने आई तो जिम्मेदार अधिकारी भी हैरत में पड़ गए। शासन-प्रशासन को इस ओर जल्द से जल्द ध्यान देना चाहिए और इस कड़ी तक पहुंचना चाहिए, जिससे इस बात का पता चल सके कि असल बात क्या है। उत्तरकाशी के डीएम आशीष चैहान ने कहा कि इन सभी गांवों को रेड जोन में शामिल किया है। इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं की ओर से भेजी गई रिपोर्ट को नियमित रूप से मदर-चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए।

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