उत्तराखण्ड में भूमाफियाओं के खुले सुर, कहना- हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता

रामनगर : तराई पश्चमी वन प्रभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते ग्राम पूछड़ी में कई वर्षो से कुछ दबंग लोगों द्वारा स्थानीय अधिकारियों की आँखों में धूल झौंक कर विभागीय कर्मचारियों से मिलकर प्लॉटों को सस्ते दामों में बेचने का कारोबार चरम सीमा पर चल रहा है. सूत्रों के जानकारी से पता चला है कि नई बस्ती पुछड़ी में बाकायदा अवैध कालोनी बनाए जानने की तैयारी चल रही है। वहीं कुछ लोगों ने तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अधिकारी से शिकायत की गई तो मौके पर स्थानीय कर्मचारी को ही मौका-ए-मुआयना के लिए भेजा गया.

भूमाफियाओं के हौंसले बुलंद

उत्तराखंड वन भूमि पर अतिक्रमण किए भूमाफियाओं के हौंसले इतने बुलंद हैं कि वह खुली चुनौती देते हुए कहते हैं कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। आपको बता दें कि लगभग 10649 हेक्टेयर पर भूमाफियाओं का अवैध कब्ज़े है।

विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप

स्थानीय लोगों ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाते हुए क़हा है कि जब जंगल की भूमि पर भू-माफिया अवैध तरीके से प्लॉट काट कर स्टाम्प पेपर पर भूमि की खरीद फरोख्त कर रहे हैं तो जंगल के जिम्मेदार रखवाले शिकायत करने के बावजूद अपनी कुर्सी छोड़कर जाँच करने जाने को राजी नहीं हैं. आखिर जंगल के अधिकारी क्यों कुर्सियों पर बैठे कुर्सियों पर बोझ बने बैठे हैं और फ़्री की तनख़्वाह ले रहे हैं.

तराई पश्चिम वन विभाग की भूमि पर अवैध प्लाटिंग विभाग कार्यवाही करने को राज़ी नहीं

तराई पश्चिम वन विभाग की भूमि पर अवैध प्लाटिंग विभाग कार्यवाही करने को राज़ी नहीं हैं.  विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से ऐसा लगता है मानों कहीं न कहीं विभाग इस मामले मे लिप्त है, जो इतने बड़े घोटाले मे अधिकारी कार्यवाही करने से कतरा रहा है. देखा जाय तो उत्तराखण्ड का शासन और प्रशासन दावे करता है. उत्तराखण्ड शासन के जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि जो लोग इस तरह की शिकायत करते हैं उनको जनता दरबार में बुलाया जाए। शिकायत मिलने पर रामनगर तहसील और नगरपालिका की एक बार एसआईटी की निष्पक्ष जाँच कराकर कार्यवाही अमल में लायी जाय।

 

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