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सड़क न होने का दर्द, बुजुर्ग का शव 12 किमी कंधे पर ढोया, ग्रामीणों में आक्रोश

सीमांत मंच क्षेत्र से एक बार फिर दिल को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया है। यहां सड़क न होने की पीड़ा इस कदर भारी पड़ गई कि एक बुजुर्ग का शव गांव तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को 12 किलोमीटर पैदल चलकर कंधे पर ढोना पड़ा।

अस्पताल से घर ले जाते वक्त थमी बुजुर्ग की सांसें

जानकारी के अनुसार संतोष सिंह (65) निवासी खटगिरी तोक पिछले कई दिनों से बीमार थे। उनका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा था। उपचार चलने के बाद भी उनकी हालत बिगड़ती चली गई। सोमवार को परिजन उन्हें अस्पताल से घर वापस ले जा रहे थे कि रास्ते में ही उनकी सांसें थम गई।

कंधे में उठाकर शव को पहुंचाया गांव

करीब 30 किमी तक वाहन से सफर पूरा करने के बाद आगे का रास्ता न होने के कारण शव को कंधे में उठाकर गांव तक पहुंचाया गया। गांव के युवाओं ने बारिश और फिसलन भरे पगडंडियों के बीच चार घंटे की मशक्कत कर कंधों पर उठाकर शव को गांव तक पहुंचाया।

2003 से लंबित है सड़क का प्रस्ताव

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने से बीमारों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है, गर्भवती महिलाओं की जान खतरे में पड़ जाती है और अब मृतकों को भी कंधों पर ढोना मजबूरी बन गई है। बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में सड़क का प्रस्ताव 2003 से लंबित है। हालांकि, इसी महीने पीएम ग्राम सड़क योजना के तहत दोबारा सर्वे शुरू किया गया है।

Sakshi Chhamalwan

उत्तराखंड की युवा और अनुभवी पत्रकार साक्षी छम्मलवाण टीवी और डिजिटल मीडिया दोनों में कार्य का अनुभव रखती हैं। वर्तमान में वे खबर उत्तराखंड (khabaruttarakhand.com) से जुड़ी हैं। उत्तराखंड की राजनीतिक हलचल, देश-दुनिया की प्रमुख खबरें और धर्म से जुड़े विषयों पर इनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक और गहन होती है। उत्तराखंड | TV + Digital Media खबर उत्तराखंड
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