सड़क हादसे में खोया कलेजे के टुकड़े को, अब पिता भर रहे सड़कों के गड्ढे

फरीदाबाद : एक पिता ने सड़क में गड्ढे के कारण अपने कलेजे के टुकड़े को खोया और वो नहीं चाहते कि किसी के भी साथ ऐसा हो. मनोज वधवा का वो गम कभी भुलाया नहीं जा सकता लेकिन नेक काम कर दिल को तसल्ली जरुर दी जा सकती है. जी हां ऐसा ही कुछ कर रहे हैं पेश से इंजीनीयर मनोज वधवा। सरकार और प्रशासन को नींद से जगाने के लिए मनोज ने खुद दोस्तों के साथ मिलकर अपने खर्चे से रास्ते के गड्ढे भर रहे हैं, ताकि इसमे कोई चोटिल न हो सके।

टीम के साथ मिलकर भरे गड्ढे

रविवार को उन्होंने फरीदाबाद एक्शन ग्रुप के सदस्यों के साथ मिलकर सेक्टर 16-17 डिवाइडिंग रोड पर गड्ढों को भरा। इस दौरान मनोज वधवा ने सरकार औऱ पीडब्ल्यूडी विभाग के ऊपर गुस्सा निकाला और कहा कि जब वो लोग ये काम कर सकते हैं तो प्रशासन ये काम क्यों नहीं कर सकता? मनोज का कहना है कि वह शहर की सभी प्रमुख सड़कों का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसे निगम और एचएसवीपी के अधिकारियों को सौंपी जाएगी। कहा कि दोनों विभाग ऐसा नहीं करते तो फरीदाबाद ऐक्शन ग्रुप के साथ मिलकर आम आदमी इनकी भराई करेगा।

कोर्ट में लड़ रहे हैं लड़ाई

बता दें कि मनोज वधवा टेलिकॉम इंजीनियर हैं। उन्होंने सरकारी सिस्टम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि आज उनका बेटा उन्हीं की लापरवाही के कारण उनके साथ नहीं है। नेशनल हाइवे पर बाटा चौक के पास काफी गहरे गड्ढे हो गए थे। लेकिन गड्ढों पर किसी का ध्यान नहीं गया। इस मामले को लेकर वह कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसका अभी तक रिजल्ट नहीं आया है।

10 फरवरी 2014 को हुई थी बेटे की मौत

टेलिकॉम इंजीनियर मनोज वधवा ने बताया कि घटना 10 फरवरी 2014 को हुई थी जब उन्होॆने अपने कलेजे के टुकड़े को सड़क हादसे में खो दिया. उन्होंने बताया कि वो अपनी पत्नी और बेटे पवित्र (3) के साथ एक शादी समारोह से स्कूटी पर लौट रहे थे। तभी अचानक सड़क पर एक जगह पानी भरा हुआ था ये देख उन्होंने ब्रेक लगा दिया और स्कूटी का संतुलन बिगड़ने से उनका बेटा पवित्र एक नुकीले पत्थर पर गिर गया, जो कि उसकी छाती पर लगा। उसी दौरान एक अन्य गाड़ी ने उनकी पत्नी के पैर को कुचल दिया। जब मैं बेटे को लेकर अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

तब से लेकर आज तक मनोड वधवा बेटे के जाने का गम को भुला न सके और इस गम को थोड़ा कम करने के लिए वो सड़कों के गढ्डे भरने का काम करते हैं ताकि कोई मां और पिता अपने बच्चे को न खोए।

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