प्रकाश पंत की सियासी बाजीगरी से बची त्रिवेंद्र सरकार

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र समाप्त हो गया है और त्रिवेंद्र सरकार विपक्ष के किसी भी सियासी चक्रव्यूह में फंसे बिना सफलतापूर्वक सदन चलाने में कामयाब रही। त्रिवेंद्र सरकार की इस सफलता में बतौर अभिमन्यु संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत की भूमिका सबसे अहम मानी जा सकती है।
विपक्ष के हमलों को सामने से झेलने के लिए विधानसभा में त्रिवेंद्र सरकार की ओर से जो सबसे अहम किरदार सामने आया वो प्रकाश पंत ही रहे। हालांकि सदन में विपक्ष के सिपाहियों की संख्या सत्ता पक्ष की तुलना में बेहद कम है लेकिन माना जा रहा था कि पिछले कुछ दिनों में हुए घटनाक्रम सरकार के लिए सदन में मुश्किल खड़ी कर सकती है।
इन सभी घटनाक्रमों में सबसे अहम अगर कुछ था तो वो था जहरीली शराब कांड में सरकार का पक्ष मजबूती से रखना और किसी सियासी उलझन से बचना।
जाहिर है कि विपक्ष ने तैयारी तो पूरी की थी लेकिन प्रकाश पंत की सियासी बाजीगरी ने विपक्ष की हर तैयारी को धता बता दिया। जिस मसले पर त्रिवेंद्र सरकार सदन में असहज हो सकती थी प्रकाश पंत ने उसी मसले को बेहद खूबसूरती से विपक्ष के ही पाले में डाल दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने इस मसले पर एक समिति बना कर जांच करने के आदेश दे दिए और मामला ठंड़ा पड़ गया। हालांकि समिति ने अपनी रिपोर्ट सदन के अंतिम दिन पीठ को सौंप दी लेकिन उसपर चर्चा सदन में हो ही नहीं पाई। ऐसे में जहरीली शराब कांड के मसले पर त्रिवेंद्र सरकार के लिए विपक्ष कोई बड़ी अड़चन खड़ा कर पाया हो ऐसा जान नहीं पड़ता।
सीएम त्रिवेंद्र के करीबियों के स्टिंग और खुद सीएम पर उठ रहे सवालों के हमले को भी प्रकाश पंत ने झेल लिया। सदन में चर्चा के दौरान संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने इस पूरे मसले को जब विपक्ष के सियासी स्टंट के तौर पर पेश किया तो उसके बाद विपक्ष के पास भी सदन से वॉट आउट करने के अलावा कोई चारा बचा नहीं। लिहाजा अगले दिन जिस स्टिंग की खबर सुर्खियों में आ सकती थी वो विपक्ष के हंगामे की खबर के साथ सिमट गई। अब हालात ऐसे हैं कि विपक्ष इसे पार्टी स्तर पर उठाने में लगा है।
यही नहीं, प्रकाश पंत की सियासी बाजीगरी ने उत्तराखंड विधानसभा में बिना किसी व्यवधान के पूरा बजट पास करा लिया। विपक्ष की अधूरी तैयारियों और प्रकाश पंत की पूरी तैयारी की बदौलत बतौर वित्त मंत्री भी प्रकाश पंत को बजट के मसले पर कोई बड़ी परेशानी महसूस नहीं हुई। आर्थिक आरक्षण विधेयक और आबकारी विधेयक भी सर्वसम्मति से पास करा लिया। हालात ऐसे हुए कि ज्यादातर समय विपक्ष सदन से बाहर ही रहा।

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