निर्भया का सबसे पहले इलाज करने वाले दून अस्पताल के डॉ. कंडवाल बोले- सुकून मिला

देहरादून : 16 दिसंबर 2012 का वो दिन आखिर कौन भूल सकता है। दिल्ली समेत पूरा देश इस घटना से हिल गया था. लोगों मेंं रोष था लोग दिन रात सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे औऱ दरिंदों को फांसी देने की मांग कर रहे थे और एक मां भी बस यही दुआ कर रही थी कि उनकी बेटी तो नहीं रही लेकिन उन दरिंदों को जल्द फांसी हो।

85 महीने के लंबे इंतजार के बाद निर्भया रेप केस में आखिरकार पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी किया. चारों दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी दी जाएगी। इससे निर्भया की मां, वकील समेत पूरे देश के लोगों को सुकून मिला है।

निर्भया का सबसे पहले इलाज करने वाले दून अस्पताल के डॉक्टर कंडवाल

वहीं एक औऱ शख्स है जो दोषियों के डेथ वारंट से खुश है. जी हां वो हैं डॉक्टर विपुल कंडवाल. जी हां सफदरगंज अस्पताल की इमरजेंसी में निर्भया का सबसे पहले इलाज करने वाले डॉ विपुल कंडवाल ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा कोई केस नहीं देखा था। निर्भया के साथ इतनी दरिंदगी करने वालों को अब फांसी का ऐलान हो गया है इससे उन्हें सकून मिला है। इससे ऐसा लग रहा है जैसे उन पर जो बोझ था वह हल्का हो गया है। डॉ कंडवाल ने बताया कि उन्होंने गैंगरेप के कई मामले देखे,लेकिन निर्भया की हालत देखकर वे अंदर तक हिल गए थे। लाख कोशिश के बाद भी निर्भया की हालत में सुधर नहीं हो रहा था।

निर्भया की हालत को याद कर आज भी उनका कलेजा कांप उठा है- कंडवाल

उन्होंने बताया कि जिस तरह से डॉक्टरों ने निर्भया को इलाज के लिए संभाला था, उसे अपनी आंखों से देखने के बाद भी बयां नहीं किया जा सकता है. कहा कि निर्भया की हालत को आज भी याद कर उनका कलेजा कांप उठता है. ऐसा भयानक मंजर उन्होंने कभी नहीं देखा न ही ऐसा केस कभी देखा. उन्होंने कहा कि पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है. अब जाकर निर्भया की आत्मा को शांति मिलेगी।

निर्भया को मिले इस इन्साफ के बाद खासतौर पर महिलाओं में ख़ुशी है। इस पर देहरादून की महिलाओं का कहना है की वो कोर्ट के इस फैसले से खुश हैं और कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। साथ ही इस तरह के जघन्य अपराधों पर जल्द से जल्द सज़ा होने का प्रावधान होना चाहिए।

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