दून अस्पताल में तड़पता रहा मरीज, डॉक्टर आए तो वो भी फोटो खींचकर चले गए

एक मरीज सिर फटे, जबड़ा टूटे और चेहरा लहुलुहान लेकर राजधानी देहरादून के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल दून हॉस्पिटल पहुंचा। लेकिन उसके इलाज के लिए इमेरजेंसी में डॉक्टर नहीं पहुंचे। जो एक डॉक्टर आया भी तो वो मरीज की फोटो खींच कर चला गया। इस मामले ने एक बार फिर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ डॉक्टरों की लापरवाही को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
दून अस्पताल में तड़पता रहा मरीज
दरअसल ये पूरा मामला सोमवार यानी की 27 जुलाई का है। यहां राजधानी के दून अस्पताल की इमेरजेंसी में विकासनगर के छरबा का रहने वाला राजू नाम का शख्स पहुंचा। राजू के ऊपर एक भारी पत्थर गिरा था। जिसकी वजह से उसका सिर फट गया था, जबड़ा टूट गया था और चेहरे के साथ ही नाक और आंख पर भी गहरे घाव हो गए थे।
उत्तराखंड की साधवी
इमरजेंसी में नहीं आए डॉक्टर
हलात नाजुक थे इसलिए राजू को आनन फानन में दून अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। दून अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे राजू की जान बचाने के लिए जब सीनियर डॉक्टरों को फोन करके बुलाया गया वो इसके बाद भी अस्पताल नहीं पहुंचे।
आपको बता दें कि अस्पताल में आए इमरजेंसी के ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग में ऑन कॉल व्यवस्था होती है। जिसमें सीनियर डॉक्टरों को कॉल करके तुरंत बुलाया जा सकता है। लेकिन दून अस्पताल के इन सीनियर डॉक्टरों को इस ऑन कॉल व्यवस्था और जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीज से कोई भी फर्क नहीं पड़ा।
डॉक्टर आए तो वो भी फोटो खींचकर चले गए
मीडिया रिपोर्टस जो आगे बताती है वो आपको भी झकझोरकर रख देगी। रिपोर्ट के मुताबिक, दून अस्पताल के उस इमरजेंसी वॉर्ड में नेत्र रोग विभाग से जूनियर रेजिडेंट जरूर पहुंचे। लेकिन उन्होंने मरीज को देखा, उसकी फोटो खींची और वापस लौट गए।
तबीयत बिगड़ने पर जूनियर डॉक्टरों ने बचाई जान
हालांकि जब मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी, तो अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों ने खुद मोर्चा संभाल लिया। इमरजेंसी ही ओटी में तबदील कर दी गई। अलग-अलग विभाग से अगल अगल जूनियर डॉक्टर इमरजेंसी में पहुंचे और सर्जरी करके राजू की जान बचाई गई। फिलहाल राजू को ICU में शिफ्ट किया गया है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। लेकिन कहीं ना कहीं इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में सीनियर डॉक्टरों की लापरवाही और ऑन कॉल पर ना पहुंचने के रवैये की भी पोल खोलकर रख दी है।