देहरादून : जहां खुशियों की शहनाई बजनी थी वहां आज छाया है मातम, आंसू दे गया बेटा

चित्रेश बिष्ट की शहादत को भला कौन भूल सकता है…और वो तारीख जब उनकी शादी थी…जी हां वही देश का जांबाज सैनिक मेजर चित्रेश बिष्ट जो जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में एलओसी से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर एक आईईडी ब्लास्ट में शहीद हो गए. यह धमाका उस वक्त हुआ जब मेजर बिष्ट आतंकियों की ओर से लगाई गई बारूदी सुरंग को डिफ्यूज़ करने की कोशिश कर रहे थे. 7 मार्च यानी बीते दिन शहीद की शादी ती और आज के दिन वो अपनी दुल्हनिया के साथ सात फेरे लेकर गृह प्रवेश करने वाले थे…जहां आज खुशियों की शहनाई बजती वहां आज मातम छाया है.

आईईडी को डिफ्यूज करते वक्त शहीद हुए चित्रेश बिष्ट

जी हां पुलवामा हमले के एक दिन बाज ही नौशेरा सेक्टर में मेजर चित्रेश बम डिस्पोजल टीम का नेतृत्व कर रहे थे. यहां आतंकियों ने आईईडी बिछा रखी थी. मेजर चित्रेश ने एक आईईडी को डिफ्यूज़ करने में सफलता पा ली, लेकिन दूसरे आईईडी को डिफ्यूज करते वक्त डिवाइस ऐक्टिवेट हो गई. इसके बाद हुए ब्लास्ट में उन्हें गंभीर रूप से चोटें आईं जिसकी वजह से वह बाद में शहीद हो गए.

आज वो दुहल्निया लेकर गृह प्रवेश करने वाले थे लेकिन..

आपको बता दें मेजर चित्रेश बिष्ट देहरादून के निवासी थे जिनके पिता उत्तराखंड पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर रहते हुए राज्य की सेवा कर चुके हैं औऱ रिटायर्ड हुए. बड़ा भाई परिवार के साथ फोरन रहता है. बीते दिन यानी गुरुवार 7 तारीख मार्च को मेजर चित्रेश बिष्ट की शादी थी. और आज वो दुहल्निया लेकर गृह प्रवेश करने वाले थे लेकिन किसे पता था की ये तारीख सिर्फ तारीख बनकर रह जाएग.

बेटा देश की रक्षा कर गया लेकिन अनगिणत आंसू दे गया

किसे पता था कि इस दिन न घर में चहल-पहल होगी, न महिला संगीत होगा, न हल्दी हाथ की रस्म होगी और न दूल्हा घोड़ी चढ़ेगा…क्यों कि जो दूल्हा बनने वाला था वो तो पहले ही देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बलिदान दे गया. कल जरुर माता पिता के हाथों में बेटे की शादी का कार्ड होगा औऱ सपना देख रहे होंगे की आज बेटा होता तो घर में शहनाई बजती…माता-पिता रिश्तेदार समेत उनका बेटा भी नाचता…लेकिन आज आंखों में सिर्फ आंसू रह गए हैं. वो बेटा देश की रक्षा कर गया लेकिन अनगिनत आंसू दे गया.

28 फरवरी को शादी के लिए छुट्टी आने वाले थे चित्रेश बिष्ट

बता दें बेटे की शहादत के दिन भी पिता शादी का कार्ड बांटने गए थे कि अचानक चित्रेश के दोस्त का फोन आया औऱ उसने चित्रेश बिष्ट के परिजनों को उनकी शहादत की खबर दी. चित्रेश तीन फरवरी को ही छुट्टी से ड्यूटी पर गए थे. इससे पहले चित्रेश मऊ में ट्रेनिंग करने गए थे. औऱ वो 28 फरवरी को शादी के लिए छुट्टी आने वाले थे.

मेजर चित्रेश भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से साल 2010 के पासआउट थे. इस वक्त वह सेना की इंजीनियरिंग कोर में थे. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस पूरी घटना पर दुख व्यक्त किया है.

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