देहरादून : बिगड़ा थाली का जायका, लोग थैली में ले जा रहे पाव भर टमाटर, एक के दो हिस्से

केंद्र सरकार के नए एक्ट से उत्तराखंड में किसानों के किसानों के चेहरे खिल गए हैे लेकिन इस नए एक्ट ने आम जनता के मुंह के स्वाद बिगाड़ दिया है. जी हां टमाटर बाजारों में बहुत महंगे मिल रहे हैं। इस महंगाई में लोग पाव भर टमाटर घर ले जा रहे हैं और एक टमाटर का इस्तेमाल दो बार में किया जा रहा है। टमाटर के महंगे होने से लोगों की थाली का जायका बिगड़ गया है। सिर्फ टमाटर ही नहीं बल्कि प्याज भी महंगे हो गए हैं जिससे लोग प्याज ले जाने में भी कतरा रहे हैं। बता दें कि अब देहरादून के टमाटर दिल्ली में बिक रहे हैं और दून वासियों को टमाटर महंगे दामों में मिल रहे हैं। ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में प्रदेश के किसान सीधे दूसरे राज्यों को टमाटर भेज रहे हैं, जबकि दून में आपूर्ति पहले से आधी हो गई है जिससे देहरादून के लोगों को टमाटर ऊंचे दामों में दिए जा रहे हैं।

उत्तराखंड के लोगों को भुगतना पड़ रहा खामियाजा

आपको बता दें कि इन दिनों जौनसार बावर, चकराता, कालसी, नैनबाग, डामटा, पुरोला, नौगांव, सकलाना समेत अन्य क्षेत्रों से देहरादून और विकासनगर की मंडियों में रोजाना लगभग 1200 क्विंटल टमाटर पहुंचता था लेकिन ये घटकर मात्र 200 से 400 क्विंटल रह गई है। ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए प्रदेश के किसान 800 से 1000 क्विंटल टमाटर सीधे दिल्ली और उत्तर प्रदेश के आढ़तियों को बेच रहे हैं जिससे उत्तराखंड के लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

अधिक मुनाफे के लिए बाहर भेज रहे हैं टमाटर 

किसानों का कहना है कि देहरादून की मंडी में उन्हें टमाटर 30 से 35 रुपये प्रति किलो मूल्य मिलता है। जबकि, दूसरे राज्यों के आढ़ती उन्हें 38 से 40 रुपये प्रति किलो दे रहे हैं। यही वजह है कि किसान दून में टमाटर बेचने से कतरा रहे हैं और अधिक मुनाफे के लिए बाहर टमाटर भेज रहे हैं। आवक कम होने से दून में भी टमाटर थोक में 35 से 40 रुपये किलो की दर से बिक रहा है, जबकि फुटकर बाजार में इसकी कीमत 70 से 90 रुपये है। मंडी के अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ों से आपूर्ति बढ़ते ही दाम नियंत्रण में आने की संभावना है।

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