देहरादून : पिता की राह पर बेटा, पापा सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल तो बेटा भी बना अधिकारी

देहरादून : हर मां-बाप अपने बच्चों को ऊंचे मुकाम पर देखना चाहते हैं. औऱ बच्चों को उनकी मंजिल मिले ये भी हर माता-पिता का सपना होता है…और जब वो मुकाम वो मंजिल बच्चों को मिलती है तो बच्चों से ज्यादा खुशी माता-पिता को ही होती है. लेकिन कुछ ऐसे बच्चे भी होते हैं जो पिता की ही तरह बनना और उनके कदमताल पर, उनकी राह पर चलना चाहते हैं. बेटे के मंजिल को पाने पर माता-पिता को खुशी तो होती ही है लेकिन वो खुशी दोगुनी हो जाती है जब बेटा दादा-पिता की कदम से कदम मिलाकर उसी मुकाम में पहुंचे जाए. कुछ ऐसी ही कहानी है करनाल के गुरप्रीत की.

4 साल की कठिन परिश्रम के बाद गुरप्रीत को इस मुकाम पर देख पिता भावुक

जी हां देहरादून के आईएमए में आयोजित पासिंग आउट परेड में देश के लिए रक्षा के लिए 347 नौजवान भारतीय सेना का हिस्सा बने। इसके साथ ही 80 विदेशी कैडेट भी पास आउट हुए। जिसमे से एक थे करनाल के गुरप्रीत सिंह विर्क. जो की युवा सैन्य अधिकारी बनें. 4 साल की कठिन परिश्रम के बाद गुरप्रीत को इस मुकाम पर देख पिता भावुक हो उठे. साथ ही बेटे को भी अपने ऊपर गर्व है की वह पिता की राह पर चलकर सेना में अधिकारी बना.

नौजवान सैन्य अधिकारी गुरप्रीत सिंह सैकेंड जनरेशन ऑफिसर हैं जो की करनाल के निवासी हैं. उनके पिता काला सिंह  विर्क लेफ्टिनेंट कर्नल हैं औऱ देश की सेवा कर रहे हैं जबकि मां हाऊस वाइफ है.

बचपन से था सपना…कि सेना में जाकर देश की सेवा करनी है-गुरप्रीत

गुरप्रीत का कहना कि बचपन से उनका सपना था की सेना में जाकर देश की सेवा करनी है.  उन्होंने बताया के वह सैकेंड जनरेशन के सेना अधिकारी बनें हैं. पिता सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं तो उन्हें देखकर भी यही सोचते थे कि मैं भी सेना में जाऊंगा औऱ देश की सेवा करुंगा. और यही सोच लिए आझ 4 साल के लम्बे इंतजार के बाद मुकाम हासिल किया.

बेटे को 5वीं बिहार में भेजा गया-पिता

वहीं गुरप्रीत के पिता काला सिंह विर्क का कहना है कि मां की मेहनत के कारण ही बेटा आज इस मुकाम पर हैै. क्योंकि बेटे की देखभाल मां ने ही की…वो हमेशा ड्यूटी पर बाहर ही रहे. साथ ही पिता ने जानकारी दी कि उनके बेटे को 5वीं बिहार में भेजा गया है जिसमें रहकर वो देश की सेवा करेंगे.

बेटे के बेटे को सेना में अधिकारी देख पिता खुश होते-गुरप्रीत के पिता

गुरप्रीत के पिता का कहना है कि मेरे पिता(गुरप्रीत के दादाजी) का सपना था की मैं सेना में जाऊं…मैं तो सेना में हूं ही लेकिन आज अगर वो जिंदा होते तो बेटे के बेटे को सेना में अधिकारी देख बहुत खुश होते.

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