देहरादून breaking : पूर्व दर्जाधारी मनीष वर्मा और उनकी पत्नी ने किया सरेंडर, कोर्ट के बाहर से भाई भी अरेस्ट

देहरादून : पूर्व दर्जाधारी मनीष वर्मा और उनकी पत्नी ने कोर्ट में सरेंडर कर लिया है, जबकि मनीष के भाई को पुलिस ने कोर्ट के बाहर से किया गिरफ्तार किया है। फिलहाल, तीनों को जेल भेज दिया गया है। आपको बता दें कि साल 2012 में सुभारती ट्रस्ट के ट्रस्टी की शिकायत पर मनीष वर्मा, उनकी पत्नी और भाई के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

कोर्ट ने दिए थे तीनों को गिरफ्तार करने के आदेश

आपको बता दें कि देहरादून का पूर्व दर्जाधारी मनीष वर्मा उसकी पत्नी नीतू वर्मा व उसके भाई संजीव वर्मा की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उच्चतम न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष दो दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश पारित किया था। 25 अगस्त 2021 की सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि जमानत अर्जी खारिज होने के आदेश की तिथि से दो दिन के भीतर मनीष वर्मा उसकी पत्नी नीतू वर्मा और उसके भाई संजीव वर्मा को ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा। अगर वह दो दिनों में आत्मसमर्पण नही करते है तो तीसरे दिन जांच अधिकारी बिना किसी रूकावट के तीनों अभियुक्तों को गिफ्तार कर लेंगे।  जिसके बाद आज दोनों कोर्ट पहुंचे और सरेंडर किया।

मनीष वर्मा उनकी पत्नी और भाई की जमानत कर थी रद्द 

बता दें कि धोखाधड़ी के एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने बीते 16 अगस्त को मनीष वर्मा उनकी पत्नी और भाई की जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया था। हालांकि, 18 अगस्त को जिला एंव सत्र न्यायालय ने उनकी जमानत मंजूर कर दी थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने जिला एंव सत्र न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने के आदेश दिए थे।

ये है मामला

आपको बता दें कि मामला 2012 का है जहां सुभारती ट्रस्ट के ट्रस्टी का आरोप था कि सभी ने ट्रस्ट को 100 बीघा जमीन बेचने का अनुबंध किया था, लेकिन मौके पर जमीन केवल 33 बीघा ही पाई गई। उन्होंने करीब 67 बीघा जमीन के कागजात फर्जी दर्शाए थे, जिसके बाद से मामला विचाराधीन था।राज्य महिला आयोग की पूर्व उपाध्यक्ष अमिता लोहनी ने ऊर्जा निगम में घोटालों की शीघ्र जांच व विभिन्न विभागों में मूल निवासियों को प्राथमिकता दिए जाने की मांग की है। शुक्रवार को उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने कहा कि ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशकों के पद पर कई लोग राज्य के मूल नागरिकों की तैनाती का विरोध कर रहे हैं। जबकि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।

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