देहरादून के सागर पालीवाल बने अफसर, पिता ऑनरेरी कैप्टन रिटायर, बस ये सपना रह गया अधूरा

देहरादून : आज देश की रक्षा के लिए 333 सैन्य अधिकारियों ने पास आउट परेड में कदमकाल किया और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखते हुए देश के लिए न्यौछावर होने की शपथ ली। लेकिन मायूसी भी हाथ लगी क्योंकि कोरोना के कारण न तो परिजन अधिकारी बेटे की पीओपी में शामिल हो पाए और न ही सेना में अधिकारी बने बेटे की वर्दी में सितारे लगा पाए जिसका हर कैडेट्स और माता-पिता को इंतजार था।

नथुवावाला पुष्प विहार निवासी सागर पालीवाल बने अफसर

उत्तराखंड की भूमि सैनिकों की भूमि कहलाती है और इसलिए पीएम मोदी ने उत्तराखंड में सैन्य धाम बनाने की बात कही थी। क्योंकि उत्तराखंड के कई वीर जवानों ने देश की रक्षा करते हुए अपनों प्राणो की आहूति दी। वहीं देश की रक्षा के लिए तैयार हुए देहरादून के नथुवावाला पुष्प विहार निवासी सागर पालीवाल। जी हां आज सागर पालीवाल पास आउट होकर अफसर बने जाएंगे। उनके पिता ऑनरेरी कैप्टन राजेंद्र प्रसाद 8वीं गढ़वाल राइफल में तीन दशक की सेवा के बाद रिटायर हुए। मां दीपा पालीवाल एक गृहणी हैं।

बेटे में बचपन से ही सेना में जाने का जनून था-सागर के पिता

लेकिन मलाल रहा की माता-पिता बेटे की पासिंग आउट परेड में शामिल नहीं हो पाए। पिता ने बताया कि बेटे में बचपन से ही सेना में जाने का जनून था। सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से स्कूल की पढ़ाई करने के बाद उसका एनडीए में चयन हुआ। कहा कि सेना में अफसर बनकर उसने परिवार ही नहीं क्षेत्र का नाम रोशन किया है।लेकिन उन्हें पासिंग आउट परेड में न जा पाने का मलाल भी है। क्योंकि हर माता पिता की इच्छा होती है कि कड़ी मेहनत के बाद पासिंग आउट परेड में वो बेटे के कंधों पर सितारे सजाए जो वो कोरोना के चलते नहीं कर पाए। सागर के पिता ने कहा कि वो टीवी में देखकर इस पर को महसूस करेंगे।

IMA में कल पास आउट होने वाले 333 कैडेट्स में मुख्यतः इस बार इन राज्यों से है।

उत्तराखंड 31
हरियाणा- 39
उत्तरप्रदेश 66
आंध्र प्रदेश 4
असम- 2
बिहार- 31
चंडीगढ़ -3
छत्तीसगढ़- 4
दिल्ली- 7
गुजरात -8

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