सबके पास हथियार, फिर क्यों लाठी-डंडों और पत्थरों से लड़ते हैं भारत-चीन के जवान ?

नई दिल्ली : भारत और चीन दोनों ही देश परमाणु शक्तियों से संपन्न हैं। जिस जगह पर विवाद चल रहा है। दोनों ही देशों के पास वहां पर्याप्त मात्रा में हथियार भी हैं। बड़ा सवाल यह है कि फिर लाठी-डंडों से सैनिकों के बीच झड़प हुई। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो जवान शहीद हो गए। इस घटना के बारे में जो शुरुआती जानकारी आ रही है, उसके मुताबिक सीमा पर गोली नहीं चली है। दोनों देशों के सैनिकों का खून बहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी सैनिकों ने लाठी-डंडों और पत्‍थरों का इस्‍तेमाल किया। ऐसे में सवाल उठता है कि परमाणु हथियारों से संपन्न दो देशों के जवान 14,000 फीट की ऊंचाई पर लाठी-डंडों और पत्‍थरों से क्यों लड़ रहे हैं ?

45 साल बाद किसी सैनिक की जान गई

भारत-चीन बॉर्डर पर करीब 45 साल बाद किसी सैनिक की जान गई है। साल 1975 में LAC पर आखिरी बार चीन के हमले में भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। तब अरुणाचल प्रदेश में चीन ने घात लगाकर हमला किया था जिसमें चार सैनिक शहीद हुए थे। भारत ने चीन पर बॉर्डर क्रॉस कर हमले का आरोप लगाया था मगर चीन हमेशा की तरह मुकर गया। तबसे लेकर सोमवार तक, बॉर्डर पर झड़प तो कई बार हुई लेकिन किसी की जान नहीं गई थी।

नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी आम
उधर, भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी आम है और इसमें दोनों तरफ के जवान मारे जाते हैं। लेकिन चीन के साथ करीब 3500 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बड़े से बड़े तनाव के बावजूद बात हाथापाई तक ही सीमित रहती है। दरअसल, भारत और चीन ने तय किया है कि दोनों के बीच चाहे कितने गहरे मतभेद हों, सीमा पर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए। दोनों देशों ने अब तक इसका पूरी तरह पालन किया था।

सैनिक के पास हथियार नहीं होंगे

दोनों देशों ने यह तय किया है कि सीमा पर अग्रिम चौकियों पर जो भी सैनिक तैनात होंगे, उनके पास हथियार नहीं होंगे और अगर रैंक के मुताबिक अफसरों के पास बंदूक होगी तो उसका मुंह जमीन की तरफ होगा। यही वजह है कि एलएसी पर दोनों तरफ के सैनिक निहत्थे एकदूसरे को अपने इलाके से खदड़ते हैं और हथियारों का इस्तेमाल नहीं होता है। एलएसी पर तैनात दोनों तरफ के सैनिकों को इसकी खास ट्रेनिंग दी जाती है कि कुछ भी हो जाए हथियार का इस्तेमाल नहीं करना है।

तनाव चरम पर पहुंच गया

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। गलवान घाटी में सेनाओं को पीछे करने की कवायद के दौरान दोनों देशों की सेनाओं में झड़प की खबर है। सेना के मुताबिक, हिंसक संघर्ष में भारत ने एक अधिकारी और दो जवान खो दिए हैं। चीन की तरफ कितना नुकसान हुआ है, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद, दोनों सेनाओं के वरिष्‍ठ अधिकारी मौके पर मुलाकात कर हालात संभालने की कोशिश में लगे हुए हैं।

भारत-चीन के बीच समझौते
दोनों देशों ने लगातार बातचीत से लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल पर कभी स्थिति बेकाबू नहीं होने दी। 1993 में नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री रहते हुए मेनटेनेंस ऑफ पीस ऐंड ट्रैंक्विलिटी समझौते पर दस्तख़त हुए। उसके बाद 1996 में दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने के उपायों पर समझौता हुआ। 2003 में वाजपेयी सरकार और 2005 में मनमोहन सिंह सरकार के दौर में भी चीन से समझौते हुए। इसके बाद 2013 में बॉर्डर डिफेंस कोऑपरेशन एग्रीमेंट हुआ। डोकलाम में कई दिनों तक दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनातनी रही लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा से इस विवाद का अंत हो गया।

ये है ताजा विवाद

एनबीटी के अनुसार सूत्रों का कहना है कि भारत और चीन के बीच यह समझ बनी थी कि जब हमारे आर्थिक और नागरिक संबंध अच्छे और परिवक्व हो जाएंगे, तब जाकर सीमाओं के मसले सुलझाया जाएगा। लेकिन मई के शुरुआती दिनों में चीनी सैनिकों ने LAC पर आक्रामक रुख अपनाना शुरू किया था। पूर्वी लद्दाख में चार जगहों पर पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने घुसपैठ की। बड़ी संख्‍या में चीनी, सैनिक आर्टिलरी और बख्‍तरबंद गाड़ियों के साथ LAC के पास मौजूद हैं।

गलवान घाटी और पैंगोंग झील, दो मुख्‍य पॉइंट हैं जहां दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। तमाम बातचीत के बाद भी चीन के सैनिक गलवान घाटी से हटने को तैयार नहीं थे। भारतीय सैनिक चीनी जवानों को कल रात पीछे धकेल रहे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच खूनी झड़प हो गई जिसमें भारतीय सेना का एक अधिकारी और दो जवान शहीद हो गए।

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