कोर्ट के फैसले को दिखाया ठेंगा, फिर सामने आया ट्रिपल तलाक का मामला

रुड़की(शुभांगी)- जिस ट्रिपल तलाक को लेकर पिछले दिनों देशभर में हाहाकार मचा रहा और सड़क से लेकर संसद तक ट्रिपल तलाक पर खूब बहस हुई. उसी ट्रिपल तलाक का एक मामला रुड़की के मंगलौर थाना क्षेत्र में सामने आया है। जहाँ 16 साल बाद एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को तीन बार तलाक,तलाक,तलाक बोलकर अपने वैवाहिक रिश्ते से अलग कर दिया। जबकि दोनों के वैवाहिक जीवन मे रहते पांच मासूम बच्चे भी है बावजूद इसके पति अपनी पत्नी से कोई रिश्ता नही रखना चाहता, पीड़ित पत्नी अपने मासूमो को लेकर पुलिस से इंसाफ की गुहार लगा रही है।

18 मार्च 2002 को हुआ था निकाह

आपको बता दें कि 18 मार्च 2002 को जनपद हरिद्वार के ग्राम धनपुरा निवासी एक युवती की शादी मंगलौर थाना क्षेत्र के गाँव मंडावली निवासी खुशदिल के साथ हुई थी। दोनों वैवाहिक जीवन से बहोत खुश थे, लगभग 16 साल के इस वैवाहिक जीवन में पांच बच्चे हुए. जिनमे तीन लड़कियां और दो लड़के हैं. पांचो बच्चे अभी नाबालिक है, इसी दौरान पति को कोई और भा गई और उसका किसी अन्य के साथ सम्बंध बन गए. जब इसकी भनक पत्नी को लगी तो हस्ते खेलते परिवार में मानो कोहराम सा मच गया।

ट्रिपल तलाक बोलकर सब रिश्ते नाते किए खत्म

दोनों में इस मसले को लेकर मन मुटाव रहने लगा और एक दिन ऐसा आया कि पति खुशदिल ने अपनी पत्नी को ट्रिपल तलाक बोलकर सब रिश्ते नाते खत्म कर दिए। हालांकि जो रजिस्टर्ड नोटिस पत्नी को दिया गया है वो 29 जनवरी 2016 का है। जिसमे पति द्वारा पत्नी पर चरित्रहीन का आरोप लगाते हुए गवाहों की मौजूदगी में ट्रिपल तलाक देना बताया गया है। साथ ही घर के कीमती जेवरात और नगदी को भी साफ करने का आरोप लगाया गया है।

पीड़ित पत्नी ने सभी आरोपों को किया खारिज

लेकिन इन सभी आरोपो को पीड़ित पत्नी ने सिरे से ख़ारिज करते हुए बताया कि उसके पति ने लगभग एक सप्ताह पूर्व उसे तीन बार तलाक बोलकर घर से निकल जाने की धमकी दी थी, लेकिन पत्नी ने पति के ट्रिपल तलाक को ना मानते हुए उसी के घर मे रहने का मन बनाया हुआ है। लेकिन पति अब उसे अपनी पत्नी मानने को कतई तैयार नहीं है। जिसको लेकर पीड़ित पत्नी अब पुलिस की शरण मे पहुँची है और इंसाफ की गुहार लगा रही है।

इस खबर ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए है। सवाल ये है कि जब ट्रिपल तलाक को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने स्थिति साफ कर दी है और संसद में बकायदा कानून बनाया गया है तो फिर ट्रिपल तलाक जैसी कुरितिया क्यों जन्म ले रही है। बरहाल ट्रिपल तलाक को लेकर निष्कर्ष भले ही निकाल लिया गया हो लेकिन इस तरह की घटनाएं ट्रिपल तलाक के कानून को चिढ़ाती दिखती है।

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