महाकाल एक्सप्रेस में भगवान की “सीट” पर विवाद, रेलवे ने बताया सच

दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वाराणसी से इंदौर के बीच काशी महाकाल एक्सप्रेस का उद्घाटन करते हुए उसे हरी झंडी दिखाई थी। ट्रेन में भगवान शंकर के लिए भी एक सीट आरक्षित रखी गई थी जिस पर हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने धर्मनिरपेक्षता का हवाला देकर सवाला उठाया था। अब इस विवाद पर इंडियन रेलवे केटरिंग ऐंड टूरिजम कॉर्पोरेशन ने सफाई देते हुए कहा है कि यह सिर्फ उद्घाटन के लिए था जिसका मकसद इस प्रॉजेक्ट की सफलता के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद लेना था।

रेलवे ने एक बयान जारी कर कहा कि रविवार को उद्घाटन के दौरानपूजा के लिए ट्रेन स्टाफ ने एक ‘अपर बर्थ पर अस्थायी तौर पर श्री महाकाल की तस्वीर’ लगाई थी। बता दें कि एआईएमआईएम मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर आपत्ति जताते हुए पीएमओ को टैग करके ट्वीट किया था। ओवैसी ने संविधान की प्रस्तावना की एक तस्वीर के साथ एएनआई यूपी के एक ट्वीट को रीट्वीट किया था। एएनआई के ट्वीट में लिखा था, ‘काशी महाकाल एक्सप्रेस (वाराणसी से इंदौर) के कोच B5 की सीट नंबर 64 को भगवान शिव के लिए एक मिनी-टेंपल में तब्दील किया गया है। ट्रेन को पीएम मोदी ने कल (रविवार) विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरी झंडी दिखाई थी।

काशी महाकाल एक्सप्रेस 3 ज्योतिर्लिंगों- इंदौर के नजदीक ओमकारेश्वर, उज्जैन के महाकालेश्वर और वाराणसी के काशी विश्वनाथ को जोड़ेगी। इस ट्रेन की पहली व्यावसायिक यात्रा 20 फरवरी से शुरू होने वाली है। आईआरसीटीसी ने अपने बयान में कहा, ‘नई काशी महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन के स्टाफ ने एक अपर बर्थ पर अस्थायी तौर पर श्री महाकाल की तस्वीर लगाकर पूजा की थी जिसका मकसद इस प्रॉजेक्ट की सफलता के लिए उनका आशीर्वाद पाना था। यह सिर्फ उद्घाटन के लिए था, सिर्फ एक बार के लिए है।

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