राजनीतिक अखाड़ा बना अस्पताल का निर्माण, यहां जनता भुगत रही खामियाजा

लालकुआं(सचिन गुप्ता)- लालकुआं के हल्दूचौड़ में बनने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है क्योंकि निर्माण कार्य प्रारंभ हुए 3 वर्ष बीत चुके हैं बावजूद इसके अस्पताल का निर्माण अभी भी अधूरा पड़ा है।

2014 में किया हरीश चंद्र दुर्गापाल ने अस्पताल का शिलान्यास 

गौरतलब है कि हल्दूचौड़ क्षेत्र में तत्कालीन सरकार में श्रम मंत्री रहे हरीश चंद्र दुर्गापाल ले अस्पताल का शिलान्यास नवंबर 2014 में किया था जिसके बाद जून 2015 में पहली किस्त का आवंटन हुआ और अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू किया गया। कार्यदाई संस्था को अस्पताल के निर्माण की अवधि 18 माह तय की गई थी। मगर तय समय के बाद भी अस्पताल का निर्माण कार्य बजट के अभाव में रुका हुआ है।

स्थानीय लोगों को दूर जाना पड़ रहा इलाज के लिए

ऐसे में स्थानीय लोगों की माने तो उन्हें आज भी हल्द्वानी या अन्य शहरों में जाकर इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है साथ ही गंभीर रूप से बीमार हुए लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

राजनीतिक अखाड़ा बना अस्पताल का निर्माण

वहीं क्षेत्रीय विधायक नवीन दुम्का का कहना है कि वह अस्पताल के निर्माण कार्य में बजट का प्रावधान कर कार्य में तेजी लाने को की कोशिश करेंगे तो वहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल का कहना है कि विकास की बात करने वाली भाजपा सरकार में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप पड़ी है और हल्दूचौड़ का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी बजट के अभाव में निर्माण कार्य रुका हुआ है उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस ध्यान नहीं देती तो क्षेत्र की जनता आंदोलन को भी बाध्य होगी।

विधानसभा क्षेत्र में एक भी उच्चीकृत अस्पताल नहीं

भले ही जनप्रतिनिधि एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं मगर अस्पताल का निर्माण कार्य ना होने से सबसे ज्यादा नुकसान क्षेत्र की जनता को हो रहा है। बताते चलें कि पूरे लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में एक भी उच्चीकृत अस्पताल नहीं है और जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बने हुए हैं वह डॉक्टर ही मौजूद नहीं है ऐसे में यहां के लोगों को हल्द्वानी या अन्य शहरों में जाकर इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।

दुर्भाग्य की बात तो यह है कि उत्तराखंड राज्य बने 17 वर्ष पूरे हो चुके हैं मगर लालकुआं और आसपास के क्षेत्रों में एक भी उच्चीकृत अस्पताल ना होना जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैया को दर्शाता है।

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