चीन की नई चाल से भारत की चिंता बढ़ी?

बीजिंग में रविवार से चीन अपनी सबसे महत्वाकांक्षी ‘वन बेल्ट, वन रूट’ परियोजना  को मुकाम तक पहुंचाने के लिए 14 और 15 मई को शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहा है, इसमें 130 देशों के 1500 रिप्रेजेंटेटिव शामिल हो रहे हैं। नॉर्थ कोरिया का डेलिगेशन भी आ सकता है।  रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन और फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते के भी आने की संभावना है।

अमेरिका ने अचानक यूटर्न लेते हुए चीन के ‘वन बेल्ट, वन रोड’ फोरम में शामिल होने का फैसला किया है। अमेरिका का यह कदम भारत पर काफी दबाव डालने वाला है,  हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल वागले ने कहा कि भारत का कोई प्रतिनिधिमंडल इसमें भाग लेगा अथवा नहीं, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है.

चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘वन बेल्ट वन रोड’ (OBOR) से अब नेपाल भी जुड़ गया है। इस योजना में सहमति न जताने वाले देश भारत को अकेले छोड़ते हुए शुक्रवार को इस परियोजना में शामिल होने के लिए हस्ताक्षर कर दिए। भारत को ओबीओआर के तहत चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर को लेकर आपत्ति है क्योंकि इसके पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से गुजरने का प्रस्ताव है.

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