चमोली : देखिए कैसे जान जोखिम में डालकर बच्चे जाते हैं स्कूल

चमोली: उत्तराखंड में बारिश आफत बनकर बरस रही है. खासकर पहाड़ी इलाकों में बारिश से बुरा असर देखने को मिल रहा है. जिसने कई लोगों की जान भी ले ली और कइयों के परिवार उजड़ गए. वहीं चमोली के कुछ स्कूली बच्चों ने कठिनाई का सामना कर साबित किया की पढ़ाई कितनी जरुरी है उनके लिए. तभी तो उफनते नाले को पार कर और जान जोखिम में डालकर भी स्कूल जा रहे हैं लेकिन सरकार गहरी नींद में है. हमे, आपको औऱ सरकार को इनसे जरुर कुछ सीख लेनी चाहिए और साथ ही बच्चो की इस समस्या को जल्द से जल्द हल करना चाहिए.

बहने के बाद अबतक नहीं बना बंगाली-स्यारी को जोड़ने वाली पुलिया 

जी हां चमोली में भी दो महीने पहले घाट क्षेत्र में बंगाली-स्यारी को जोड़ने वाली पुलिया बहने के बाद अबतक नहीं बना पाया है. इस वजह से बच्चों को रोज मौत का सफर तय कर स्कूलों तक पहुंचना पड़ता है. छात्र रोज सुबह उफनते गदेरे को एक पत्थर से दूसरे पत्थर पर कूदते हुए पार करते हैं. ऐसे में छात्रों की जान पर खतरा बना रहता है. विद्यालय में पहुंचकर शिक्षा ग्रहण करने की ललक के आगे जोखिम भरे इस सफर को तय करने से बच्चे बिलकुल भी नहीं हिचकते हैं. बावजूद इसके अबतक इस पुलिया को बनाने का कार्य शुरू नहीं किया गया है.

आपको बता दें बच्चे इतने साहसी हैं कि 2 माह पहले स्यारी गधरे पर बने पुलिया के बह जाने के बाद स्कूली बच्चों ने खुद लकड़ी डालकर एक स्थायी पुलिया बनाया था. लेकिन वो भी गदेरे के उफान में बह गया. उसके बाद छात्रों ने कई दिनों तक रोज पुलिया बनाई जो बार-बार बह जाती थी. इससे हार मानकर अब बच्चे कूदते-फांदते गदेरे को पार कर रहे हैं.

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