CAG की रिपोर्ट में कई अहम ख़ुलासे

CAG
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डेस्क। सूबे में योजनाओं की बौछार करने की दलीलें पेश करने वाली उत्तराखण्ड सरकार के काले चिट्ठे कैग की रिपोर्ट ने खोलकर रख दिए हैं। जिसमें कई महकमों में हुए घपले और घोटाले उजागर किए गए हैं तो साथ ही करोड़ों के राजस्व की गड़बड़ी भी सामने आई है। नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की इस रिपोर्ट में हैलीकॉप्टर सेवा योजनाओं में हुई मनमानी का खुलासा हुआ है। इस योजना के तहत हैलीकॉप्टर खरीद, हैलीपैडों और हवाईपट्टियों के निर्माण और रिकन्सट्रक्शन के नाम पर सरकार ने राज्य के करोड़ों रूपये बर्बाद कर दिए। इतना ही नहीं स्कूलों में बच्चों के दाखिले पर भी सरकार की नाकामी से खासा असर पड़ा है। कैग ने छात्रों को परोसे जाने वाले मिड डे मील की गुणवत्ता में भी खामियां पकड़ी हैं। भोजन में जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध न कराए जाने पर भी इस रिपोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं। मिड डे मील योजना के राज्य में धुंधले पड़ते आकर्षण के चलते स्कूलों में दाखिलों में 22 फीसदी की कमी आई है। कृषि योजनाएं तैयार करने में 21 से 31 महीनों की देरी हुई। सरकार की लेटलतीफी के चलते राष्ट्रीय कृषि विकास योजना को भी पलीता लग गया। डीपीआर तैयार किए बिना ही 56 परियोजनाओं का अनुमोदन ले लिया गया। साथ ही करोड़ो के 6 प्रोजेक्ट्स के लिए अनुमोदन तक नहीं लिया गया। पीडब्ल्यूडी, पावर कॉरपोरेशन और सिडकुल की दोषपूर्ण कार्यप्रणाली को भी कैग की इस रिपोर्ट के जरिए उजागर किया गया है। जिनसे राज्य को करोड़ो का चूना लगा है। गौरतलब है कि कैग की इस रिपोर्ट को गैरसैंण सत्र के दौरान सदन पटल पर रखा गया था।

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