
हरिद्वार के सिडकुल थाना क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब गायत्री विहार कॉलोनी में एक सेप्टिक टैंक से एक शव बरामद किया गया। शुरुआती जांच में ही मामला जितना गंभीर नजर आया, उससे कही ज्यादा चुनौतियां पुलिस के सामने खड़ी हो गईं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह सामने आई कि जिस कॉलोनी में यह घटना हुई, वह विकास प्राधिकरण की मंजूरी के बिना विकसित की गई अवैध कॉलोनी है।
20 दिनों से लापता चल रहा था मृतक
मृतक की पहचान फूल सिंह निवासी रावली महदूद के रूप में हुई है , जो बीते करीब 20 दिनों से लापता था। पुलिस के लिए पता लगाना अब सबसे बड़ी चुनौती है कि फूल सिंह सेप्टिक टैंक तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई है। जांच के दौरान सामने आया कि गायत्री विहार कॉलोनी का कोई भी नक्शा पास नहीं है। यदि यह कॉलोनी अधिकृत होती, तो यहां सीसीटीवी कैमरे, गेट पर एंट्री रजिस्टर और सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था अनिवार्य होती। ऐसी स्थिति में पुलिस को आने-जाने वालों की जानकारी, संदिग्ध गतिविधियों और घटनाक्रम की अहम कड़ियां आसानी से मिल सकती थी। लेकिन अवैध कॉलोनी होने के कारण यहां न तो कैमरे लगे हैं और न ही कोई चौकीदार तैनात है।
मामले की जांच में जुटी पुलिस
इस पूरे मामले में कॉलोनाइजर की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। नियमों को दरकिनार कर विकसित की गई इस कॉलोनी की लापरवाही अब पुलिस जांच में सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या कॉलोनाइजर की जिम्मेदारी तय होगी या यह मामला भी धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा। वहीं, विकास प्राधिकरण की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। बिना अनुमति के कॉलोनी विकसित होने के बावजूद अब तक कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या अवैध निर्माण पर आंखें मूंदे रखने की यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही थी? फिलहाल पुलिस हर पहलू से मामले की जांच में जुटी हुई है।