खुलासा। कुंभ को ‘प्रतीकात्मक’ रखने की कोशिश ने छीनी त्रिवेंद्र की कुर्सी?

 

अपने चार साल का कार्यकाल पूरा करने के ठीक नौ दिन पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ गया। त्रिवेंद्र सिंह रावत के कामकाज को लेकर पार्टी में सुगुबुगाहट तो थी लेकिन ऐसा मानना मुश्किल था कि उन्हें चुनावों से एक साल पहले कुर्सी से हटाने का खतरा पार्टी मोल लेना चाहेगी। लेकिन ऐसा खतरा लिया गया और अब तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हैं और उन्हें कामकाज संभाले हुए एक महीने से अधिक का समय पूरा हो गया है।

त्रिवेंद्र सिंह रावत को क्यों हटाया गया ये एक बड़ा सवाल है और इसका जवाब स्पष्ट रूप से पार्टी नेता कभी भी नहीं दे पाए। हालांकि अब ‘द कारवां’ पत्रिका के डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रकाशित एक खबर में ये दावा किया गया है कि कुंभ को सीमित और ‘प्रतीकात्मक’ रखने की त्रिवेंद्र सिंह रावत की कोशिश उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की बड़ी वजह बनी। लेख में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और बीजेपी नेताओं के साथ बातचीत के आधार पर ये संभावना जताई गई है। लेख में बताया गया है कि चूंकि कुंभ के आयोजन को सीधे तौर पर केंद्र मॉनिटर करता है। केंद्र की ओर से कुंभ के आयोजन के लिए बड़ी धनराशि उपलब्ध कराई जाती है ऐसे में त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुंभ को ‘प्रतीकात्मक’ रखने की योजना केंद्र को नहीं पसंद आई। केंद्र चाहता था कि कुंभ का आयोजन ‘भव्य’ तरीके से हो।

‘द कारवां’ में छपे लेख में दावा किया गया है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत के ‘प्रतीकात्मक’ कुंभ की अवधारणा को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, कई महंत, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और खुद बीजेपी के नेता नाराज थे। वो चाहते थे कि कुंभ का आयोजन न सिर्फ भव्य हो बल्कि कोविड के कम के कम प्रतिबंधों के साथ हो। ‘हिंदू हार्टलैंट’ कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले होने वाले कुंभ को सीमित करने का खतरा भी केंद्र नहीं लेना चाहता था। इससे हिंदुओं के नाराज होने का खतरा था। लेख में ये भी बताया गया है कि कुंभ को सीमित रखने से आश्रमों को कुंभ के दौरान मिलने वाले दान में भी कमी आने की आशंका थी। चूंकि अखाड़ों के अनुयायियों की बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश से आती है और अगर कुंभ में इन्हें आने की अनुमति न दी जाती तो इस नाराजगी का असर उत्तर प्रदेश के चुनावों में देखने को मिल सकता था। रिपोर्ट में बताया गया है कि संतों को लगने लगा था कि उत्तराखंड सरकार विधर्मी की तरह व्यवहार कर रही है और कुंभ मेले को टालने की कोशिश में लगी है। इसीलिए कोविड -19 का हवाला दिया जा रहा है।

‘द कारवां’ ने बीजेपी नेताओं से बातचीत के आधार पर दावा किया है कि अखाड़ों और त्रिवेंद्र सिंह रावत के बीच चल रही रस्साकसी में अखाड़े भारी पड़े और त्रिवेंद्र सिंह रावत को इस्तीफा देना पड़ा। बीजेपी और केंद्र सरकार अखाड़ों के संतों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती थी। हालांकि कुछ बीजेपी नेताओं ने कहा है कि, न सिर्फ कुंभ बल्कि कई और वजहें भी थीं जो त्रिवेंद्र सिंह रावत को पद से हटाए जाने की वजह बनी। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के पास इस बात की रिपोर्ट भी लगातार जा रही थी कि बीजेपी 2022 के विधानसभा के चुनावों में त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में वापसी नहीं कर पाएगी।

‘द कारवां’ की रिपोर्ट कहती है कि छह मार्च को बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमन सिंह और उत्तराखंड के प्रभारी दुष्यंत सिंह गौतम आनन फानन में देहरादून पहुंचे। उस समय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत गैरसैंण में बजट सत्र में थे। दोनों नेताओं ने त्रिवेंद्र सिंह रावत देहरादून तलब किया। त्रिवेंद्र सिंह रावत जब देहरादून पहुंचे तो चाय परोसे जाने के दौरान ही उन्हें दोनों नेताओं ने इस बात की सूचना दी कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा उनसे मिलना चाहते हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत को इसी वक्त समझ आ गया था कि उनकी कुर्सी जाने वाली है। आधे घंटे की ये बैठक खत्म हो गई। इसके अगले दिन शाम को त्रिवेंद्र सिंह रावत दिल्ली पहुंच चुके थे। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर वो उनसे मिलने पहुंचे। इस दौरान बीएल संतोष भी मौजूद थे। बीएल संतोष संघ और पार्टी के बीच कड़ी के तौर पर काम कर रहें हैं। इस बैठक से पहले जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह की बैठक हो चुकी थी। जेपी नड्डा और बीएल संतोष के साथ त्रिवेंद्र सिंह रावत की तकरीबन आधे घंटे की बातचीत में जेपी नड्डा ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को स्पष्ट कर दिया बीजेपी उनके नेतृत्व में 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने नहीं जा रही है। ये त्रिवेंद्र सिंह रावत को इस्तीफा देने का इशारा था। इसके बाद 9 मार्च को त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

खोजी पत्रकारिता करने वाली पत्रिक ‘द कारवां’ ने अपने डिजिटल प्लेटफार्म में अंग्रेजी भाषा में इस संबंध में एक लेख प्रकाशित किया है। यहां हमने उस लेख के आधार पर मिले सार को लिखा है। आप ‘द कारवां’ के लिंक पर यहां से जा सकते हैं – 

BJP fired ex-Uttarakhand chief minister TS Rawat for restricting Kumbh gatherings

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here