भाजपा-कांग्रेस को कर्नल कोठियाल की चुनौती, निर्दलीय ठोकेंगे ताल, कांग्रेस के मन की हुई

देहरादून : जैसे की कयास लगाए जा रहे थे ठीक उसके उलट हुआ…जी हां पहले आशंका जताई जा रही थी की भाजपा पौड़ी सीट से कर्नल अजय कोठियाल को उम्मीदवार घोषित कर सकती है लेकिन ऐसा नहीं हुआ भाजपा ने तीरथ सिंह रावत के नाम का ऐलान किया लेकिन कर्नल कोठियाल ने भी सबको बता दिया कि उन्हें किसी पार्टी या किसी के नाम की जरुरत नहीं है बल्कि उनका काम ही उनकी पहचान है और वहीँ उनको सफलता दिलाएगी.

जी हां खबर है कि कर्नल कोठियाल ने पौड़ी से नामांकन पर्चा खरीदा है और 25 तारीख को वह अपना नॉमिनेशन करेंगे। कर्नल कोठियाल ने ये बता दिया है कि वो कांग्रेस और भाजपा के लिए अकेले हीक काफी है.

कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा कर्नल कोठियाल को पौड़ी से उम्मीदवार कर सकती है घोषित

बता दें पहले कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा कर्नल कोठियाल को पौड़ी से उम्मीदवार घोषित कर सकती है क्योंकि यूथ फाउंडेशन के संस्थापक सेना से रिटायर्ड हैं और कई युवाओं को सेना भर्ती की ट्रेनिंग दे रहे हैं साथ ही बात की जाए पौड़ी जिले की तो पौड़ी आर्मी वालों की पृष्ठभूमि मानी जाती है तो ऐसे में इसका फायदा कर्नल कोठियाल को वोट हासिल कर हो सकता है.

भाजपा के बाद मिलता कांग्रेस को मौका लेकिन कांग्रेस ये चाहती थी

आशंका जताई जा रही थी कि अगर भाजपा कर्नल की उम्मीदवार घोषित नहीं करती को कांग्रेस को मौका मिल सकता है कर्नल कोठियाल को ऑफर देेने का और कांग्रेस में शामिल होने का..लेकिन ऐसा नहीं हुआ दोनों ही पार्टियों ने अपने अपने उम्मीदवार घोषित किए जिसमें भाजपा ने तीरथ सिंह रावत के नाम का ऐलान किया तो वहीं चर्चा है कि कांग्रेस मनीष खूंडूरी के नाम का ऐलान करेगी जिससे दोनों और दरवाजे बंद होते देख कर्नल कोठियाल ने दम दिखाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया.

कर्नल ने बताया कि सैनिक जंग के मैदान में नहीं डरा तो राजनीति के मैदान में कैसे डरेगा

उन्होंने दिखाया कि एक देश का सैनिक जंग के मैदान में नहीं डरा तो राजनीति के मैदान में कैसे डरेगा. उन्होंने निर्दलीय होकर ताल ठोकी. जो की कांग्रेस चाहती ही थी. कांग्रेस की रणनीति यह थी कि यदि कर्नल कोठियाल निर्दलीय लड़ते हैं तो भाजपा को मिलने वाला फौजी वोट बैंक बंट जाएगा और इससे भाजपा को पराजय मिलेगी.

क्या भाजपा को होगा इससे नुकसान

वहीं भाजपा या कांग्रेस दोनों के कर्नल कोठियाल को उम्मीदवार घोषित न करने से उनके समर्थकों में गु्स्सा है औऱ नाराजगी है. जिसे वो सोशल मीडिया पर बयां कर रहे हैं. देखने वाली बात होगी की कर्नल कोठियाल के निर्दलीय़ चुनाव लड़ने से क्या वाकई में भाजपा को नुकसान के रुप में झेलना होगा?

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