बंशीधर भगत के बहाने बीजेपी ने फिर साधा क्षेत्रीय और जातीय समीकरण

देहरादून: भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष बन गया है। प्रदेश अध्यक्ष के लिए पहले ही भाजपा के वरिष्ठ विधायक बंशीधर भगत का नाम टाॅप पर था। उनके नाम की घोषणा भले ही आज हुई हो, लेकिन उनको बधाई देने वाले दो दिन पहले से ही जुटने लगे थे। भाजपा हो या कांग्रेस हर राजनीति दल क्षेत्रीय और जातीय समिकरणों को संतुलित करने के बाद ही किसी भी बड़े पद पर ताजपोशी करते हैं। भाजपा ने भी वही किया। कुल मिलाक बंशीधर भगत की निर्विवाद छवि, कुमाऊं के मैदानी और पहाड़ी दोनों इलाकों में अच्छी पकड़, और लंबे राजनीति अनुभव ने उनको सबसे मजूबत दावेदार बनाया।

उत्तराखंड की राजनीति में एक परंपरा सी बन चुकी है कि अगर मुख्यमंत्री गढ़वाल से है, तो प्रदेश अध्यक्ष कुमाऊं से होगा। इसमें भी सबसे अहम भूमिका क्षेत्रीय व जातीय संतुलन की रहेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत गढ़वाल मंडल से हैं और राजपूत हैं। ऐसे में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष कुमाऊं से ब्राह्मण नेता के हिस्से में जाना करीब-करीब तय था। इन सारे समीकरणों में पूर्व मंत्री एवं कालाढूंगी से विधायक बंशीधर भगत संतुलन के प्रत्येक पैमाने पर फिट बैठ रहे हैं। नेता और सारकारें भले ही यह कहते रहे हों कि क्षेत्र और जाति उनके लिए मायने नहीं रखते, लेकिन असल में उनको इन्हीं बातों से ज्यादा सरोकार होता है। इस बार भी यही हुआ। क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने के लिए बंशीधर भगत के नाम पर मुहर लगाई गई।

दरअसल, मुख्यमंत्री गढ़वाल से हैं, तो प्रदेश अध्यक्ष कुमाऊं से चुना जाना पहले से ही तय माना जा रहा था। कुमाऊं के नेताओं के बीच ही मुख्य मुकाबला भी था। बंशीधर भगत का नाम पहले दिन से ही तेजी से आगे आ रहा था। राजनीति जानकारी पहले ही यह मानकर चल रहे थे कि कि वही प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे। वरिष्ठता के मामले में भी वह सभी दावेदारों पर भारी पड़े। इसके अलावा उनकी निर्विवाद छवि और कुमाऊं मंडल के पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में पकड़ को भी तवज्जो दी गई।

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