उत्तराखंड आयुष विभाग का बड़ा खुलासा, बाबा रामदेव की दवा को नहीं मिला था लाइसेंस!

देहरादून : कोरोना ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लिया है। अब तक दुनियाभर में लाखों लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। मौतों का सिलसिला भी लगातार जारी है। कोरोना की दवा बनाने के लिए दुनियाभर में रिसर्च चल रहा है। दवा बनाने के कई देश और कंपनियां दावा कर चुकी हैं।

इन्हीं दावों के बीच बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की पतंजलि योगपीठ ने भी कोरोनिल नाम से कोरोना किट बनाई। इसको लेकर दावा किया कि इससे कोरोना पूरी तरह ठीक हो जाएगा। लेकिन, बाबा रामदेव के इस दावे और दवा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पतंजलि की दवा कोरोनिल को उत्तराखंड आयुष विभाग की तरफ से लाइसेंस जारी किया है। आयुष मंत्रालय ने विभाग से इस बारे में जानकारी मांगी है।

विभाग के लाइसेंसिंग अधिकारी डॉ. यतेंद्र सिंह रावत का कहना है कि दिव्य फार्मेसी के नाम पर 12 जून को लाइसेंस जारी किया गया है। लाइसेंस में कोरोनिल वटी समेत दो अलग-अलग मात्रा वाली श्वासारी दवा को इम्यूनिटी बूस्टर बताया गया है। अब कंपनी को नोटिस जारी कर पूछा जाएगा कि वह किस आधार पर इम्यूनिटी बूस्टर की दवाओं को कोविड-19 की दवा बता रही है।

बाबा रामदेव के दावों पर हरक सिंह रावत ने भी बयान दिया है। हरक सिंह रावत का कहना है कि आयुष मंत्रालय से कोई अनुमति नहीं ली गई है। पतंजलि योगपीठ ने इम्यूनिटी बूटस्टर के लिए आवेदन किया था, जिसकी उनको अनुमति दी जाएगी। बाबा रामदेव की कोरोना दवा पर उठा विवाद बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार पहले ही बाबा की दवा के प्रचार पर रोक लगा चुकी है।

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