बड़ी खबर : सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘इंडिया’ ही ‘भारत’, जानें सालों बाद क्यों उठा ‘इंडिया’ पर सवाल

नई दिल्ली : संविधान में इंडिया की जगह भारत नाम रखने के लिए संविधान में संशोधन की याचिका में दखल से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका को संबंधित अथॉरिटी प्रतिवेदन की तरह देखेगी, इसके लिए संबंधित मंत्रालय के सामने याचिका भेजी जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इसके लिए सरकार के सामने ही मांग रखे।मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोबडे की बेंच ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में कहा कि याचिकाकर्ता ने इस मामले में कोर्ट को क्यों अप्रोच किया है, जबकि संविधान में साफ लिखा है कि इंडिया जो कि भारत है।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इंडिया ग्रीक शब्द इंडिका से आया है और इस नाम को हटाया जाना चाहिए। जब याचिकाकर्ता ने लगातार ये दलील रखी और सुप्रीम कोर्ट का रुख याचिका सुनने के लिए नहीं दिखा तो याचिकाकर्ता ने कहा कि इस याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर संबंधित मंत्रालय के सामने भेजने की इजाजत दी जाए। तब सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि संविधान में भी भारत नाम लिखा है। लिखा है इंडिया दैट ईज भारत। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप संबंधित मंत्रालय के सामने अपना प्रतिवेदन दें और सरकार को संतुष्ट करें।

सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया था कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह संविधान में बदलाव करे और इंडिया शब्द को बदलकर हिंदुस्तान या फिर भारत कर दे। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर दो जून को सुनवाई करने का फैसला किया था। याचिकाकर्ता ने कहा है कि हमारी राष्ट्रीयता के लिए भारत शब्द को संविधान में जोड़ना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से मना करते हुए याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर संबंधित मंत्रालय के सामने भेजने को कहा।

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