बड़ी खबर : उत्तराखंड में 4 दिनों तक खोजे जाएंगे कंकाल, 6 सालों में मिल चुके इतने

रुद्रप्रयाग : केदारनाथ आपदा शायद ही कोई कभी भुला पाए। उस भीषण तबाही वाली डरावनी आपदा के जख्म अत तक भी हरे हैं। उनको देखकर ऐसा लगता है, जिसे कुछ दिनों पहले की बात हो। उस भयंकर आपदा में कई लोगों की जानें चली गई थी। कई लोगों को आज तक कुछ पता नहीं चल पाया है। उसी केदारनाथ आपदा में लापता या मारे गए लोगों के कंकालों को खोजने का काम शुरू किया जा रहा है।

पुलिस की ओर से कंकालों को खोजने के लिए अभियान चलाया जाएगा। गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग और दूसरे ट्रैकिंग रूट पर आज से 4 दिनों तक चलने वाला अभियान शुरू हो गया है। पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में दस टीमें बनाई है। इनमें स्थानीय लोगों को भी शामिल किया गया है। इस दौरान मिलने वाले कंकालों के सैंपल लेने के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। 16/17 जून 2013 की रात को केदारनाथ धाम में भीषण आपदा आई थी, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। 4000 हजार से ज्यादा शव बरामद किए गए थे, लेकिन कई लोगों का पता नहीं चल पाया था।

नर कंकालों की खोज के लिए पिछले छह 6 सालों में कई बार सर्च अभियान चलाया जा चुका है, जिसमें 600 से ज्यादा कंकाल मिल चुके हैं। केदारनाथ-वासुकीताल, केदारनाथ-चोराबाड़ी, त्रियुगीनारायण-गरूड़चट्टी-केदारनाथ, कालीमठ-चैमासी-खाम-केदारनाथ, जंगलचट्टी और रामाबाड़ा के ऊपरी क्षेत्र केदारनाथ बेस कैंप के ऊंचाई वाले क्षेत्र समेत मंदिर के आसपास के क्षेत्र, भैरवनाथ मंदिर, गौरीकुंड-गोऊंमुखड़ा, गौरीकुंड से मुनकटिया के ऊपरी क्षेत्र होते हुए सोनप्रयाग रूट पर सर्च अभियान चलाते हुए नर कंकालों की खोजबीन की जाएगी।

टीम में रुद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ी गढ़वाल से सात सब इंस्पेक्टर, 20 कांस्टेबल के साथ एसडीआरएफ के तीन सब इंस्पेक्टर, एक हेड कांस्टेबल और 19 कांस्टेबल शामिल हैं। साथ ही रुद्रप्रयाग जिले से 10 फार्मेसिस्ट भी टीम में हैं। प्रत्येक टीम में सब इंस्पेक्टर समेत पुलिस और एसडीआरएफ के दो-दो कांस्टेबल और एक फार्मेसिस्ट को रखा गया है। टीमों को रात्रि प्रवास की सामग्री स्लीपिंग बैग समेत सुरक्षा उपकरण और वीडियोग्राफी के लिए कैमरे भी दिए गए हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here