बड़ा खुलासा : सियाचिन में जवानों को नहीं मिल रहा पर्याप्त खाना और कपड़े, उत्तराखंड के जवान की मौत

देहरादून : उत्तराखंड समेत आज पूरे देश के लिए बुरी खबर है। टिहरी के साबली गांव निवासी हवलदार रमेश बहुगुणा की सियाचिन में अत्यधिक ठंड और ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत हो गई। जवान की 31 जनवरी को तबीयत खराब हुई थी औऱ उसे इलाज के लिए चंडीगढ़ मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया था जिसके तीन दिन बाद जवान ने दम तोड़ दिया। तबीयत खराब होने और मौत का कारण अत्यधिक ठंड के साथ ही ऑक्सीजन की कमी बताया गया है। वहीं सीएजी ने संसद में जो रिपोर्ट पेश की है उसमे सियाचिन में तैनात जवानों की हालत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।

कैग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा,ऐसे जी रहे जवान

जी हां सीएजी ने सोमवार को संसद में अपनी रिपोर्ट पेश की और खुलासा हुआ कि सियाचिन, लद्दाख, डोकलाम जैसे ऊंचे क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को पर्याप्त मांत्रा में राशन और कपड़े नहीं मिल पा रहे हैं. जवानों को जरूरत के हिसाब से कैलरी नहीं मिल पाई। साथ ही सियाचिन में माइनस डिग्री तापमान में खपने वाले खास कपड़ों की खरीद में भी काफी देरी हुई। पुराने स्पेसिफिकेशन के कपड़े और उपकरण मिलने से सैनिक बेहतर कपड़े और उपकरणों से वंचित रहे। सीएजी की यह रिपोर्ट 2017-18 के दौरान की है, जिसे संसद में पेश किया गया। जानकारी मिली है कि जवानों को ऊर्जा की उपलब्धता 82 फीसदी तक कम हुई।

उपकरणों और कपड़ों की किल्लत

कैग की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि सियाचिन में जवानों को जरूरी उपकरणों और कपड़ों की किल्लत रही औऱ देरी से मिले। जिसके चलते जवान या तो पुराने उपकरणों से काम चला रहे हैं या बिना उपकरण के रह रहे हैं। कुछ उपकरणों के मामले में कमी 62 से 98 फीसदी तक दर्ज की गई। वहीं बात करें कपड़ों की चो सैन्य बलों को नवंबर 2015 से सितंबर 2016 के दौरान बहुउद्देश्यीय जूते नहीं दिए गए, जिसके चलते वे पुराने जूतों की मरम्मत कराकर काम चलाया।

सन ग्लासेज की किल्लत

बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने साल 2015-16 से लेकर 2017-18 तक जवानों को सामानों की हुई किल्लत को लेकर पिछले साल मार्च 2019 में सफाई दी थी. रक्षा मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि सैनिकों को जमीनी स्तर पर सामानों की किल्लत नहीं होने दी गई. हालांकि कैग ने कहा कि रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई सफाई को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. कैग ने स्नो गॉगल्स की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी कमी 62 से 98 फीसदी के बीच दर्ज की गई.

पुराना फेस मास्क, पुराना जैकेट

वहीं कैग रिपोर्ट ने कहा कि कपड़ों और राशन के साथ ही पुराने फेस मास्क, पुराने जैकेट और स्लीपिंग बैग को खरीदा गया. इससे जवानों को परेशानी हुई और वे नये प्रोडक्ट का लाभ नहीं उठा सके. रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा प्रयोगशालाओं द्वारा रिसर्च के अभाव की वजह से देश को इन सामानों के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ा.

जवानों को कई बार 82 परसेंट तक कम कैलोरी मिली-कैग रिपोर्ट

कैग ने 9000 फीट ऊंचे स्थान पर रहने के लिए दिए जाने वाले विशेष राशन और आवास की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है. बता दें कि लेह लद्दाख और सियाचिन में रहने वाले जवानों को कैलरी की कमी पूरा करने के लिए विशेष खाना दिया जाता है. कैग के मुताबिक उन्हें इसके इस्तेमाल में भी कंजूसी करनी पड़ी. कैग ने टिप्पणी की है कि विशेष खाने के बदले दिया जाने वाले सब्स्टीट्यूट की सप्लाई में कमी की वजह से जवानों को कई बार 82 प्रतिशत कम कैलोरी मिली. लेह की एक घटना का जिक्र करते हुए कैग ने कहा है कि यहां से स्पेशल राशन को सैनिकों के लिए जारी हुआ दिखा दिया गया, लेकिन उन्हें हकीकत में ये सामान मिला ही नहीं था.

ठंड और ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई देवभूमि के लाल की मौत, बड़ा सवाल ये

वहीं बता दें कि देवभूमि के लाल रमेश बहुगुणा की अत्यधिक ठंड और ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत हुई है। कैग की रिपोर्ट और जवान की जिस कारण मौत हुई है उन कारणों को देखते हुए अब रक्षा मंत्रालय और सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर जो जवान भारी बर्फ के बीच देश की करक्षा कर रहे हैं उन्हें पूरी सुविधा, उपकरण, खाना क्यों पूरा नहीं दिया जा रहा है?

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