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पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के वो बड़े फैसले, यूं ही नहीं बनी थीं आयरन लेडी

breaking uttrakhand newsनई दिल्ली : आज देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और आयरन लेडी इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि है। 31 अक्टूबर 1984 की सुबह अपने ही अंगरक्षकों द्वारा गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गयी थी। इंदिरा गांधी ने 1966 से 1977 के बीच लगातार तीन बार देश की बागडोर संभाली और उसके बाद 1980 में दोबारा इस पद पर पहुंचीं। उनको ऐसे ही आयरन लेडी नहीं कहा जाता। अपने कार्यकाल में इंदिरा गांधी ने कई बड़े फैसले लिए थे। जिनके लिए उनको जाना जाता है। आइये आपको बताते हैं कि अंदिरा गांधी के वो पांच बड़े फैसले क्या थे….?

पाकिस्तान के टुकड़े

1971 के युद्ध में इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े करके दक्षिणी एशिया की राजनीति ही बदल दी थीद्य ये टीस पाकिस्तान को हमेशा चुभती रहेगीद्य दरअसल पाकिस्तान के सैन्य शासन ने पूर्वी पाकिस्तान के नागरिकों पर जुल्म की इंतहा कर दी थी। उसके नतीजे में करीब 1 करोड़ शरणार्थी भागकर भारत में चले आए थे। बाद में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ जिसमें न सिर्फ पाकिस्तान की शर्मनाक हार हुई बल्कि उसके 90,000 सैनिकों को भारत ने युद्धबंदी बनाया था।

प्रिवी पर्स यानी राजभत्ते की समाप्ति

आजादी के बाद भारत में अपनी रियासतों का विलय करने वाले राजपरिवारों को एक निश्चित रकम देने की शुरुआत की गई थी। इस राशि को राजभत्ता या प्रिवी पर्स कहा जाता था। इंदिरा गांधी ने साल 1971 में संविधान में संशोधन करके राजभत्ते की इस प्रथा को खत्म किया। उन्होंने इसे सरकारी धन की बर्बादी बताया था।

ऑपरेशन मेघदूत

1984 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन मेघदूत को अंजाम दिया था और पाकिस्तान की कब्र खोदी थी। इस ऑपरेशन की मंजूरी इंदिरा गांधी ने ही दी थी। दरअसल पाकिस्तान ने 17 अप्रैल, 1984 को सियाचिन पर कब्जा करने की योजना बनाई थी, जिसकी जानकारी भारत को लग गई। भारत ने उससे पहले सियाचिन पर कब्जा करने की योजना बनाई और इस ऑपरेशन का कोड नाम ‘ऑपरेशन मेघदूत’ था।

बैंकों का राष्ट्रीयकरण 1969

19 जुलाई, 1969 को इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया। यह अध्यादेश देश के 14 निजी बैंकों के राष्ट्रीयकरण के लिए था। इन 14 बैंकों में देश का करीब 70 फीसदी जमा था। अध्यादेश पारित होने के बाद इन बैंकों का मालिकाना हक सरकार के पास चला गया। ऐसा आर्थिक समानता को बढ़ावा देने के लिए किया गया।

पोखरण में परमाणु परीक्षण

18 मई, 1974 भारतीय इतिहास का सबसे अहम दिन माना जाता हैद्य इस दिन भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण करके दुनिया को हैरत में डाल दिया था। इस ऑपरेशन का नाम स्माइलिंग बुद्धा था। दुनिया के ताकतवर देशों की परवाह किए बिना सिर्फ इंदिरा गांधी ही इस फैसले को अमली जामा पहना पायी थीद्य

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