रोड़वेज में जुगाड़ से बने थे बाबू, अब करनी पड़ेगी कंडक्टरी

देहरादून: उत्तराखंड परिवहन निगम ने बस अड्डों पर जमे बाबूओं के अब मानक तय कर लिए गए हैं। इसको लेकर परिवजन मुख्याल ये आदेश जारी किये गए हैं। आदेश की मानें तो जुबाड़बाजी से बाबूगिरी कर रहे कर्मचारियों को अब दिल्दी-यूपी की दौड़ लगानी होगी। वो अब कार्यालयों में नहीं बैठ सकेंगे।

रोडवेज के प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चैहान ने सभी डिपो के लिए आदेश जारी किए कि केवल मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र लेने वालों को ही अक्षम माना जाएगा। उन्होंने प्रदेश के सभी डिपो और बस अड्डों में तैनात लिपिकों की रिपोर्ट की समीक्षा की। इसमें पाया गया कि दून मंडल में 231, नैनीताल मंडल में 217 और टनकपुर मंडल में 81 जबकि देहरादून और दिल्ली के कश्मीरी गेट समेत आनंद विहार आइएसबीटी पर 37 लिपिकों की जरूरत है।

कई कर्मचारी स्वीकृत पदों के सापेक्ष लिपिकों की कम संख्या का लाभ लेकर कई परिचालक खुद को अक्षम बताकर जुगाड़बाजी से डिपो में लिपिक पद पर डयूटी कर रहे। नियमानुसार परिचालक के लिए बसों पर डयूटी देने की अनिवार्यता है और उनके किमी भी तय हैं। ऐसे में अब जुगाड़बाजी से डटे परिचालकों को फिर बसों पर भेजा जाएगा।

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