डेंगू के साथ ही उत्तराखंड में ये बीमारी भी बरपा रही कहर

Chikungunya
उत्तराखंड में अब तक डेंगू ने लोगों को अपनी चपेट में लिया हुआ था, लेकिन अब इसके साथ एक और बीमारी से प्रदेश के लोग जूझ रहे हैं। ये बीमारी जिन लोगों को हो रही उन्हें तेज बुखार के साथ जोड़ों में दर्द के साथ आठ से दस दिन तक के ये बीमारी पेरशान कर रही है। इस बीमारी में मरीज डेंगू से ज्यादा परेशानी झेल रहा है।

गौरतलब है कि आज कल उत्तराखंड में चिकनगुनिया ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। प्रदेश में बच्चों के साथ बड़े भी चिकनगुनिया की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि सरकारी आंकड़ों में डेंगू के फैलने की बात ज्यादा बताई जा रही है, लेकिन सरकार ने चिकनगुनिया को लेकर अभी तक कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है। मरीज सरकारी अस्पतालों के बजाय निजी अस्पतालों में ज्यादा इजाल करा रहे हैं।

डेंगू ने इस बार प्रदेश भर में अपना कहर बरपाया था। सरकार ने डेंगू की रोकथाम को लेकर जो प्रयास किए गए, वह डेंगू को कंट्रोल करने में नाकाफी रहे। जिसके कारण शहर से लेकर गांव तक डेंगू ने कहर लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। यहां तक की चिकनगुनिया के साथ-साथ डेंगू के भी लगातार मामले सामने आ रहे हैं।

चिकनगुनिया से होने पर पहले कुछ दिन शरीर और जोड़ों में दर्द महसूस होता है। इसके बाद तेज बुखार होता और जोड़ों में दर्द काफी बढ़ जाता है। साथ ही त्वचा भी लाल हो जाती है और दाने उभर आते हैं। चिकित्सकों की मानें तो चिकनगुनिया के ठीक होने में एक सप्ताह से अधिक का समय लग जाता है। जोड़ो में दर्द कई बार काफी समय तक बना रहता है।

चिकनगुनिया क्या है?

चिकनगुनिया एक विषाणुजनित संक्रमण है। इसे बुखार और जोड़ों में तेज दर्द जैसे लक्षणों से पहचाना जाता है। इसका नाम तंजानिया देश की भाषा के एक शब्द से पड़ा है, जिसका अर्थ है ष्ऐसा जो विकृत हो जाता है या झुक जाता हैष्। इसका इशारा चिकनगुनिया के मुख्य लक्षण यानि कि झुक कर चलना और जोड़ों में अत्याधिक दर्द की तरफ है। हालांकि, चिकनगुनिया की वजह से मौत होना काफी दुर्लभ है।

चिकनगुनिया कैसे फैलता है?

चिकनुनिया, संक्रमित मादा टाइगर मच्छर के काटने से फैलता है। यह वही मच्छर है, जो डेंगू भी फैलाता है और इसमें अन्य बीमारियां जैसे कि जीका आदि फैलाने की भी क्षमता है।

यह मच्छर विशेषतः दिन में काटता है, विशेषकर तड़के सुबह और शाम शुरु होने के समय। यह ठहरे हुए पानी में पनपता है। चिकनगुनिया घनी आबादी वाली क्षेत्रों में तेजी से फैलता है, क्योंकि यहां उनके पनपने के काफी स्थान होते हैं।

शिशुओं और बच्चों में चिकनगुनिया के क्या लक्षण हैं?

चिकनगुनिया के लक्षण हमेशा सामने आए, यह जरुरी नहीं, खासकर कि बच्चों में। यदि लक्षण दिखाई भी दें, तो आमतौर पर निम्न लक्षण होते हैं
अचानक तेज बुखार होना
सिर में दर्द

ठंड लगना

मिचली और उल्टी (मस्तिष्क ज्वर के लक्षणों के जैसे अन्य लक्षण)
जोड़ों में काफी तेज दर्द। हालांकि, जोड़ों में दर्द वयस्कों में अधिक होता है, बच्चों में यह इतना आम नहीं है, मगर यह काफी तेज हो सकता है।

दस्त (डायरिया)

बुखार शुरु होने के दो या तीन दिन बाद चकत्ते (रैश) होना। वयस्कों की तुलना में बच्चों को चकत्ते होने की संभावना ज्यादा होती है। चिकनगुनिया के चकत्ते आमतौर पर बाजुओं, पीठ और कंधों पर होते हैं। कभी-कभार ये पूरे शरीर पर भी हो सकते हैं। कुछ बच्चों में ये चकत्ते त्वचा की रंगत बदलने जैसे दिखते है और उनके चेहरे को प्रभावित करते हैं।
चिकनगुनिया से ग्रस्त शिशु काफी चिड़चिड़े हो सकते हैं और सामान्य से अधिक रो सकते हैं। मच्छर काटने से संक्रमित होने के बाद इसके लक्षण दिखाई देने में आमतौर पर तीन से सात दिन लग सकते हैं। ये लक्षण सामान्यतरू करीब कुछ दिनों तक रहते हैं, मगर जोड़ों में दर्द और थकान काफी हफ्तों और यहां तक की महीनों तक रह सकती है। वयस्कों की तुलना में चिकनगुनिया बच्चों को अधिक गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। नवजात शिशुओं और स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त बच्चों को गंभीर जटिलता पैदा होने का खतरा सबसे अधिक होता है, जैसे कि मस्तिष्क की सूजन और गंभीर जीवाण्विक संक्रमण।

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