देहरादून- त्रिवेंद्र रावत मंत्रीमंडल बेशक भाजपा और बगावत कर कांग्रेस में आए हुए समीकरणों को साधता हो लेकिन जिलों के प्रतिनिधित्व को नहीं साधता। दरअसल इसकी वजह है कि उनके मंत्रीमंडल में उत्तरकाशी, नैनीताल, चमोली, बागेश्वर, चंपावत और रुद्रप्रयाग को कोई जगह नहीं मिली है। क्षेत्रीय संतुलन की कसौटी पर टीएसआर का मंत्रीमंडल खरा नहीं उतरता। पौड़ी जिले को सबसे ज्यादा जगह मिली है। पौड़ी से सतपाल महाराज( चौबट्टाखाल), हरक सिंह रावत( कोटद्वार) और श्रीनगर से पहली बार सदन में पहुंचे डॉक्टर धन सिंह रावत को राज्य मंत्री के रूप मे जगह मिली है। जबकि उधमसिंहनगर से कांग्रेस से बगावत कर बाजपुर जीते यशपाल आर्य और गदरपुर को चौथी बार फतह कर आए अरविंद पांडे को जगह दी गई है। वहीं टिहरी, हरिद्वार, पिथौरागढ़ अल्मोड़ा जिले से एक-एक को मंत्रीमंडल में जगह दी गई है। जबकि देहरादून जिले का खुद सीएम त्रिवेंद्र रावत प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार गठन में संघ और भाजपा के नए रणनीतिकारों की ही चली है। जिन्होंने पूर्व कांग्रेसियों और संघ को ही साधने मे ही ध्यान दिया है।