
एक विमान हादसे ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार(Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar ) की जान ले ली। काफी लंबे समय से पवार राजनीति में है। हालांकि एक पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनका करियर कुछ ही सालों पुराना था। हालांकि एक हादसे के चलते अचानक से उनका ये सफर खत्म हो गया। इसके साथ ही उनका एक सपना (Ajit Pawar Dream) भी अधूरा रह गया जिसे वो पूरा करना चाहते थे।
Ajit Pawar की दादी भी थीं राजनिति में
इसे महज संयोग कहें या फिर कुछ और, बता दें कि अजित पवार की दादी का राजनीतिक करियर भी एक दुर्घटना की वजह से खत्म हो गया था। बस फर्क सिर्फ इतना है कि वो हादसा जानलेवा नहीं था। दरअसल पवार की दादी शारदाबाई गोविंदराव पवार भी राजनीति में थीं। काफी सालों तक वो राजनीति में सक्रिय रहीं। जब शरद पवार का जन्म हुआ था, उस दौरान वो पुणे लोकर बोर्ड की सदस्य थीं।
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शरद पवार को गोद में लेकर ही पहुंच गई थीं
वो इतनी सक्रिय और जिम्मेदार थीं कि वो बोर्ड मीटिंग में शरद को गोद में लेकर पहुंच गई थीं। ये बात है 15 दिसंबर, 1940 की। उस समय शरद महज तीन दिन के थे। जून, 1938 में शारदाबाई को कांग्रेस पार्टी ने पुणे लोकल बोर्ड का चुनाव लड़ने के लिए कहा था। ये सीट महिला के लिए रिजर्व थी।
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एक हादसे ने अजित की दादी का भी रोक दिया था सफर
जिसमें वो निर्विरोध चुनी भी गईं। 9 जुलाई, 1938 से 14 साल तक वो ही चुनी गईं। लेकिन साल 1952 में एक घायल सांड़ के हमले ने सब कुछ बदल दिया। उनका राजनीतिक करियर मानो ठहर गया। इस हमले ने उनकी जान तो नहीं ली लेकिन चलने-फिरने से लाचार कर दिया। जिसके बाद ताउम्र उन्हें बैसाखियों का सहारा लेना पड़ा।
1991 में पहली बार सांसद बने अजित
आपको बता दें कि अजित पवार भी राजनिति में काफी सक्रीय रहे। वो तो 1982 में ही राजनीति में आ गए थे। साल 1991 में वो पहली बार सांसद बन गए थे। हालांकि उनका बतौर पार्टी अध्यक्ष का सफर काफी छोटा रहा। साल 2019 में उन्होंने एनसीपी से बगावत की। कानूनी लड़ाई के बाद अपने गुट के लिए एनसीपी का नाम व चुनाव चिह्न लिया।
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एनसीपी अध्यक्ष के तौर पर छोटा रहा सफर
साल 2024 में उन्होंने एनसीपी अध्यक्ष के तौर पर पहली बार चुनाव लड़ा। साथ ही शरद पवार वाली एनसीपी की तुलना में बेहतर प्रदर्शन भी किया। लेकिन उनकी असली परीक्षा से पहले ही उनका निधन हो गया। अब पार्टी किस दिशा में जाएगी ये तो वक्त ही बताएगा।
Ajit Pawar का ये सपना रह गया अधूरा…
यू तो अजित पवार ने कई बार उप मुख्यमंत्री का पद संभाला। लेकिन उनकी एक ख्वाहिश थी जो उनके चले जाने के बाद अधूरी रह गई। वो हमेशा से ही मुख्यमंत्री (Maharashtra CM) का पद संभालना चाहते थे। साल 2024 में तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी इस ख्वाहिश के बारे में पत्रकारों को भी बताया था।
बनना चाहते थे सीएम
उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि, “मैं महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना चाहता हूं, लेकिन उप मुख्यमंत्री पर ही अटक जाता हूं। इससे आगे मौका ही नहीं मिल पाता है। 2004 में एनसीपी को मौका मिला था अपना मुख्यमंत्री बनाने का, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने कांग्रेस को दे दिया।”
जानकारी के लिए बता दें कि साल 2004 में साथ शरद पवार की एनसीपी 71 सीटों के साथ विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। कांग्रेस के पास केवल 69 सीटें थी। लेकिन तब गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर विलासराव देशमुख को चुना गया था।