देहरादून के अस्पतालों में सुरक्षा भगवान भरोसे! 1896 में सिर्फ 143 के पास फायर NOC

राजधानी देहरादून के अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। 20 मई को शहर के पैनेसिया हॉस्पिटल में आग लग गई थी। हादसे में इलाज कराने आई एक बुजुर्ग महिला की दम घुटने से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद स्वास्थ्य संस्थानों की फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आने लगी है ।
देहरादून के अस्पतालों में सुरक्षा भगवान भरोसे!
उत्तराखंड में अक्सर मरीज जान बचाने के लिए राजधानी देहरादून पहुचतें हैं। लेकिन देहरादून में अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर खुद सवालों के घेरे में है क्योंकि कभी भी ये अस्पताल जानलेवा साबित हो सकते हैं। जिसका ताजा उदाहरण बुधवार को देखने को मिला था। बता दें रिस्पना पुल के पास स्थित पैनेसिया अस्पताल में आग लगने से एक मरीज की मौत हो गई थी। जबकि कई मरीज झुलस गए थे। मरीजों को तो अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। लेकिन इस घटना ने अस्पतालों की फायर सेफ्टी तैयारियों की पोल खोल दी।
1896 में सिर्फ 143 के पास फायर NOC
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देहरादून में 1896 अस्पताल, क्लीनिक, नर्सिंग होम और पैथोलॉजी सेंटर संचालित हो रहे हैं। इनमे से केवल 143 संस्थानों के पास ही फायर विभाग की NOC है। बता दें 1 जनवरी 2025 से 21 मई 2026 तक फायर विभाग ने 14 अस्पतालों को नोटिस जारी किए हैं। जबकि पूरे प्रदेश में फायर विभाग ने 68 अस्पतालों को नोटिस जारी किए हैं।
अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर लापरवाही कर रहे अस्पताल
ये आंकड़े बताते हैं की राजधानी देहरादून में अस्पताल अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर लापरवाही कर रहे हैं। पूरे प्रदेश में 583 अस्पतालों को फायर एनओसी दी गई है। वहीं देहरादून में 143 अस्पतालों को फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जारी किया गया है।
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अस्पतालों का निरीक्षण करेगी फायर सेफ्टी की टीम
वहीं पैनेसिया अस्पताल में हुई आगजनी की घटना के बाद अस्पतालों की फायर सेफ्टी के लिए फायर बिग्रेड की टीमों को लगाया है। जो मौके पर पहुंच कर अस्पताल का निरीक्षण करेगी। हालांकि फायर बिग्रेड के उपनिदेशक संदीप राणा का कहना है कि टीमें समय- समय पर जाकर निरीक्षण करती है। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में फायर सेफ्टी के इंतजाम और पानी के टैंको सहित अन्य संसाधनों को चेक किया जाता है।