
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन का एक प्रभावी और भरोसेमंद मॉडल बनकर सामने आया है। इस पहल का मूल उद्देश्य शासन को जनता के और अधिक करीब लाना, जनसमस्याओं को मौके पर सुनना और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है।
जन-जन के द्वार कार्यक्रम में 23,844 शिकायतों का समाधान
21 जनवरी 2026 तक प्रदेश के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के तहत कुल 427 कैम्पों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 3 लाख 44 हजार 85 नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी की है। इन कैम्पों के माध्यम से आम जनता ने बड़ी संख्या में अपनी समस्याएं और शिकायतें प्रशासन के सामने रखीं। कुल 35,079 शिकायत पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 23,844 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। शेष शिकायतों पर भी संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।
1,86,795 नागरिकों को सीधा मिला सरकारी योजनाओं का लाभ
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों की मौजूदगी में नागरिकों को कई जरूरी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गई। इस दौरान 46,901 आवेदन प्रमाण पत्रों, सरकारी सेवाओं और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए प्राप्त किए गए। साथ ही राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ 1,86,795 नागरिकों को सीधे तौर पर मिला, जिससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
जनपदवार आंकड़ों पर डालें नजर
जनपदवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अल्मोड़ा में आयोजित 50 कैम्पों में 46,035 नागरिकों ने सहभागिता की। हरिद्वार में 36 कैम्पों के माध्यम से 66,862 लोगों तक सरकार की पहुंच बनी। उधमसिंह नगर में 28 कैम्पों में 33,382 नागरिक जुड़े, जबकि टिहरी में 25 कैम्पों के जरिए 41,889 लोगों ने अपनी समस्याएं और सुझाव सामने रखे। देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, चम्पावत, बागेश्वर और उत्तरकाशी सहित सभी जिलों में इस अभियान को समान रूप से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।