
उत्तराखंड सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर चलाए जा रहे अभियान की जमीनी हकीकत पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी को लेकर आज व्यापार मंडल हरिद्वार की ओर से एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें नशा मुक्त उत्तराखंड अभियान की समीक्षा करते हुए इसे केवल कागजों तक सीमित बताया गया।
नशा मुक्त उत्तराखंड अभियान पर हरिद्वार व्यापर मंडल ने उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार का यह अभियान अब तक धरातल पर उतरता दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना था कि नगर कोतवाली हरिद्वार और उसके अंतर्गत आने वाली सभी पुलिस चौकियां नशे के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने में पूरी तरह विफल साबित हुई हैं।
अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष अधीर कौशिक ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, आज उन्हीं हाथों में नशे का सामान नजर आ रहा है। यह स्थिति न केवल समाज बल्कि आने वाले भविष्य के लिए भी बेहद चिंताजनक है।
मां गंगा के तट पर खुलेआम बिक रही शराब, गांजा और स्मैक
अधीर कौशिक ने कड़े शब्दों में प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि मां गंगा के पावन तट पर खुलेआम शराब, गांजा और स्मैक की बिक्री होना प्रशासन की घोर विफलता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के इन माफियाओं को स्थानीय नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते इनके खिलाफ कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
नशे के सौदागरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
कौशिक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द ही नशे के सौदागरों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए, तो अखंड परशुराम अखाड़ा और व्यापार मंडल को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। व्यापार मंडल ने सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग की कि नशा मुक्त उत्तराखंड अभियान को केवल घोषणाओं तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जाए।