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भरतनाट्यम में अरंगेत्रम से ही छा गई साईं सुप्रजा, मनमोहक प्रस्तुति से दर्शक हुए मंत्रमुग्ध

दून की साईं सुप्रजा ने सांस्कृतिक सभागार में भरतनाट्यम अरंगेत्रम की मनमोहक प्रस्तुति दी। जहां उनकी प्रस्तुति पर सभागार तालियों की आवाज से गूंज उठा। महज 16 साल की उम्र में उनकी प्रस्तुति को देख हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।

साईं सुप्रजा ने दी भरतनाट्यम अरंगेत्रम की मनमोहक प्रस्तुति

देहरादून की साईं सुप्रजा ने शनिवार को सांस्कृतिक सभागार में भरतनाट्यम अरंगेत्रम की प्रस्तुति दी। उनकी मनमोहक प्रस्तुति सभागार में मौजूद लोगों का मन मोह लिया। उनकी प्रस्तुति को देखकर कर लोग तालियां बजाते रहे। तालियों की गूंज से पूरा सभागार गूंज उठा। बता दें कि उनकी इस प्रस्तुति में उनके साथ उनकी गुरु सीके राजलक्ष्मी, विनोद कुमार राजन, अनुंध, ए.श्रीकृष्ण ने शास्त्रीय संगीत में सहयोग किया।

पांच साल की उम्र से सीख रही हैं भरतनाट्यम

बता दें कि साईं सुप्रजा पांच साल की उम्र से भरतनाट्यम सीख रही हैं। 11 सालों की कड़ी मेहनत के बाद साईं सुप्रजा आज इस मुकाम तक पहुंची हैं। शनिवार को देहरादून स्थित हिमालय सांस्कृतिक केंद्र के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में सबसे पहले घुंघरू पूजा की गई।

उसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता धामी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुवात की। इस दौरान गीता धामी ने बताया कि प्राचीन शास्त्रीय में जीवन जीने की कला अपने आप में अनूठी कला है।

प्राचीन काल से भरतनाट्यम संस्कृति का अंग

गीता धामी ने कहा कि भरतनाट्यम पर प्रस्तुति देना काफी कठिन होता है। लेकिन साईं सुपुर्जा 11 वर्षों के संघर्ष के बाद आज इस मंच तक पहुंची है। प्राचीन काल से भरतनाट्यम संस्कृति का अंग रही है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से शैक्षिक कार्यों के अलावा खेल गायक नृत्य जैसी विधाओं में भी आगे बढ़ने का अह्वावान किया है ।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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