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उत्तराखंड : कलह से मुक्ति के लिए की दूसरी शादी, उसने उतार दिया मौत के घाट

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नैनीताल : एक महिला का पहले पति के साथ हर दिन किसी ना किसी बात को लेकर झगड़ा होता रहता था। झगड़े से मुक्ति पाने के लिए महिला ने दूसरी शादी की, लेकिन दूसरी शादी उस पर भारी पड़ गई। इस मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की अदालत ने पत्नी की हत्या में आरोपित पति को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने जेल से लाये गए अभियुक्त को फिर से जेल भेज दिया। अभियुक्त को बुधवार को सजा सुनाई जाएगी।

अभियोजन के अनुसार 23 मई 2019 को थाना भवाली कोतवाली में महेंद्र सिंह बिष्ट पुत्र शेर सिंह बिष्ट ग्राम सिरोडी, भवाली, नैनीताल ने तहरीर दी। जिसके आधार पर पुलिस ने मृतका के पति अभियुक्त महेंद्र सिंह सिंह बिरोडिया पुत्र कुन्दन सिंह निवासी पूनाकोट पेटशाल, जिला अल्मोड़ा के खिलाफ धारा-302 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। वादी के अनुसार घटना के दिन अपने चचेरे भाई नितेश बिष्ट के साथ भवाली चौराहे पर खड़े थे कि देवी मंदिर रोड से चौराहे की ओर मेरी बहन किरन व उसका पति महेन्द्र सिंह आते हुए दिखायी दिये। दोनों रानीखेत रोड से पैदल जा रहे थे। सोचा दोनों घूमने जा रहे हैं तो हम घर चले गये।

22 मई 2019 को सूचना मिली कि मेरी बहन किरन का शव हैचरी के पास भवाली गांव को पैदल जाने वाले मार्ग पर पड़ा है। घटनास्थल पर देखा तो किरन मरी पड़ी थी। किरन की शादी 19 नवंबर 2019 को करन सिंह मर्ताेलिया जिला बागेश्वर के साथ हुई थी, लेकिन पारिवारिक कलह के कारण उसने अपने पति करन को तलाक दे दिया था और अल्मोड़ा में रहने लगी। डेढ़ माह पूर्व मेरी बहन किरन ने महेन्द्र सिंह के साथ चितई मंदिर में दूसरी शादी कर ली थी और शादी के पश्चात भवाली दुगई स्टेट में किराये के कमरे पर रहते थे। बहन अपने साथ भूरे रंग का बैग, जिसमें मोबाइल पैन कार्ड, आधार कार्ड बैंक की पासबुक साथ रखती थी, लेकिन घटना स्थल पर उसका बैग नहीं मिला।

अंदेशा जताया कि बहन की हत्या उसके पति महेन्द्र ने की है, किरन मायके में मुझे व मां को बताती थी कि उसका पति अक्सर मारपीट व गालीगलौज करता है। घटनास्थल पर किरन के शरीर में तीन चोट पाई गई। पीठ में रगड़ का निशान था, चेहरा पत्थर से कुचला था। पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उसने हत्या करना स्वीकार किया।

24 मई को निशानदेही पर अभियुक्त के कमरे से उंसके खून से सने कपड़े व मृतका का बैग व सामान बरामद किया गया। डीजीसी फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अपराध साबित करने को आठ गवाह परीक्षण कराए। अभियुक्त के कपड़े व मृतका के सामान में रक्त के डीएनए के आधार पर कोर्ट ने अभियुक्त को हत्या का दोषी करार दिया।

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