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उत्तराखंड : नौवीं की छात्रा का अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या!

cm pushkar singh dhami

हल्द्वानी: घर से 7 दिनों से लपता नाबालिग नौवीं की छात्रा हत्या मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खलासा हुआ है। दोनों आरोपियों ने छात्रा के साथ हत्या से पहले दुष्कम किया था। दुष्कर्म के बाद दोनों ने मिलकर उसी के दुपट्टे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। 6 अक्टूबर बुधवार को अर्द्धनग्न हालत में उसका शव आरोपियों के बताने के बाद जंगल से बरामद किया गया था। दोनों ने सच छुपाने के लिए शव के ऊपर चटाई और गद्दे डाले गए थे।

नौवीं की छात्रा 29 सितंबर की दोपहर लापता हो गई थी। परिवार के लोगों ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो छात्रा अपने किराएदार की बेटी के साथ जाती नजर आई। इसके बाद उसके साथ उसका परिचित इंदिरानगर निवासी दानिश भी नजर आया। इसी आधार पर पुलिस ने दानिश को पकड़कर पूछताछ की लेकिन, वह कहीं और जाने की बात कहकर टालता रहा।

इस दौरान बनभूलपुरा क्षेत्र के 35 कैमरों को खंगाला गया। पुलिस ने गौलाजाली रजा गेट के पास सीसीटीवी फुटेज खंगाली तो 29 सितंबर को तीन बजकर 41 मिनट पर छात्रा इंदिरानगर निवासी जीशान के साथ जाती हुई दिखाई दी। उसके बाद पुलिस ने जीशान को पकड़ लिया। उसको पकड़ने के बाद पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान जीशान ने बताया कि दानिश ने छात्रा को ट्रंचिंग ग्राउंड के पास जंगल में मारकर नाले में फेंका है। पुलिस ने जीशान की निशानदेही पर नाले से छात्रा का शव अर्धनग्न हालत में बरामद किया। शव अधिक समय तक गंदे पानी में रहने के कारण फूल गया था। दोनों आरोपियों के खिलाफ अपहरण, हत्या, सामूहिक दुष्कर्म को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ 363, 376 (3), 376 (डी), 34, 5 (ज),  302, 201, 5/6, पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

जीशान ने बताया कि छात्रा और दानिश के बीच विवाद हुआ था। सुलह कराने के लिए वह दोनों को लेकर जंगल में गया था। इस बीच जीशान ने स्मैक पीने का प्रयास किया तो छात्रा ने टोक दिया। इससे गुस्साए जीशान ने छात्रा को थप्पड़ जड़ दिया। छात्रा के बेहोश होने पर दोनों ने दुपट्टे से उसका गला घोंटकर मार दिया। पुलिस का कहना है कि दोनों ने छात्रा के साथ दुष्कर्म भी किया था।

दानिश घटना के दिन से ही पुलिस को चमका देता रहा। छात्रा की तलाश में उसने पुलिस को मंडी से लेकर कई स्थानों तक घुमाया। वह छात्रा की मां और परिजनों का भी हमदर्द बना रहा। इसी कारण किसी को उस पर शक नहीं हुआ। हर रोज सुबह वह परिजनों के साथ छात्रा को ढूंढने का नाटक करता था।

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