
देहरादून : उत्तराखंड में जहां सरकार और प्रदेश की जनता आराम से राहत की सांस लिए बैठी थी कि देवभूमि उत्तराखंड औऱ पहाड़ों की भूमि में वो कोरोना से बचे हैं वहीं जनता अब डरा हुई है लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ा रही है यहीं कारण है कि आज उत्तराखंड में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 5400 के पार हो गया है। पिछे 4 से 5 दिनों में उत्तराखंड में 1000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं जिससे उत्तराखंड में भय का माहौल है लेकिन फिर भी जिन जिलों में ज्यादा मामले सामने आए हैं वहां सिर्फ दो दिन रविवार और शनिवार का लॉकडाउन लगाया गया है।
वहीं सरकार द्वारा चारधाम यात्रा बाहरी राज्यों के लोगों के लिए खोल दी गई है। देवस्थानम बोर्ड ने उस पर फैसला सुनाते हुए आदेश जारी किया है। जिससे सक्रमण का खतरा औऱ बढ़ सकता है। हालांकि बोर्ड द्वारा बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों के लिए कोरोना जांच रिपोर्ट अनिवार्य की गई है लेकिन खतरा और खौफ बढ़ना लाजमी है। अक्सर देखा जा रहा है कि दुकानों में और बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
- कई लोग बिन मास्क के बाजरों में सड़कों पर घूम रहे हैं। हालाकिं उनका चालान भी किया जा रहा है लेकिन मात्र चालान काटकर छोड़ने से कोरोना संक्रमण नहीं रुकेगी क्योंकि हो सकता है जब तक वो पुलिस के हत्थे चढ़े और पुलिस चालान काटे तब तक बिन मास्क पहने व्यक्ति सक्रमण की चपेट में आ गया हो, और फिर वो घरवालों को अन्य को संक्रमित करे।
2. वहीं बाजारों में और दुकानों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही है। कई जगहों पर एक जगह भीड़ देखने को मिल रही है।
3. लोग बाहर बिन वजह घूम रहे हैं। सैनिटाइजेशन का काम धीमा है।
4. दुकानों में भी अधिकतर देखा जा रहा है कि दुकानदार और लोग सामान खरीदारी के समय सैनिटाइजर का प्रयोग नहीं कर रहे हैं।
5. लोग अब प्रदेश के अंदर बिन पास के इधर से उधर घूम रहे हैं जिससे उनकी जानकारी नहीं मिल पा रही है जो कंटेनमेंट जोन से अन्य जिलों में गए हों।
6. शराब की दुकानों में भारी भीड़ देखने को मिलती है जिसमे सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान भी नहीं रखा जा रहा है।