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उत्तराखंड : ऐसा क्या था कि इसके गिरने से लोग भावुक हो गए, बस एक पेड़ ही तो था

Breaking uttarakhand newsअल्मोड़ा : हर शहर की पहचान होती है। लैंडमार्क होता है। कुछ यादें ऐसी होती हैं, जो हर किसी के जेहन में सदा के लिए घर कर जाती हैं। उन यादों को लोग हमेशा के लिए सहेज लेना चाहते हैं। ऐसी ही यादें अल्मोड़ा में 200 साल के इतिहास को अपने आप में समेट बोगनवेलिया और देवदार का पेड़ पूरी शान से खड़ा था, लेकिन आज वो पेड़ गिर गया है। पेड़ के गिरने से लोग दुखी हैं। भावुक हैं…। ऐसा शायद ही आपने पहले कभी देखा होगा, लेकिन इस पेड़ के लिए कुछ लोगों की आंखें नम भी हो गई।

बोगनवेलिया से सजा ये पेड़ अल्मोड़ा की पहचान बन चुका था। पोस्ट ऑफिस रोड पर मौजूद पेड़ बोगनवेलिया से ढाका रहता था। यह पेड़ अल्मोड़ा की शान तो था ही। इस पर लिपटी बेल और उस पर लगे बैगनी फूलों की खूबसूरती अल्मोड़ा की खूबसूरती को चारचांद लगाती थी। सेल्फी के जमाने में ये पेड़ सेल्फी प्वाइंट बन चुका था, लेकिन उससे पहले जब सेल्फी का जमाना नहीं था, तब भी लोगों ने इसके पास खड़े होकर कई यादगार तस्वीरें खिंचवाई थी।

इस पेड़ से लोगों का एक नाता जुड़ चुका था। एक रिश्ता बंध चुका था। ऐसा रिश्ता जिसके टूटने और बिखरने से लोग अब भावुक हो रहे हैं। लोग बोगनवेलिया के इस पेड़ के गिरने से दुखी हैं। चैघानपाटा में बोगनबेलिया और देवदार का खूबसूरत और विशाल पेड़ भारी बारिश के कारण अब फिर कभी खड़ा नहीं हो सकेगा। पेड़ के गिरने की खबर से कई लोग उसे देखने चले आए। लोग पेड़ के साथ अपने रिश्ते को यूंही ही खत्म नहीं होने देना चाहते। इसलिए लोग उसकी टहनियों को तोड़कर या काटकर अपने घर ले जा रहे हैं। उन टहनियों को बोगनबेलिया और देवदार की यादों के रूप में अपने पास समेट लेना चाहते हैं।

शहर के बुजुर्ग तो इस पेड़ को इस हालत में देखकर भावुक हो गए। बोगनवेलिया इस पेड़ को हर साल मई और जून के महीने में बैगनी फूलों से लाड देता था…जिससे इसकी खूबसूरती देखते ही बनती थी। पर्यटक इसे देखकर खुद को उसके पास जाने से नहीं रोक पाते थे। सेल्फी लेना तो बनता ही था…। दुनिया जब कोरोना से पूरी तरह मुक्त होगी और लोग फिर से अल्मोड़ा आएंगे, तो वो बोगनवेलिया को जरूर मिस करेंगे…। जैसे अल्मोड़ा के लोग कर रहे हैं। बोगनवेलिया और देवदार भी एक-दुसरे को मिस करेंगे।

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