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उत्तराखंड : कोरोना के कहर के बीच अस्पताल में चमगादडों का कब्जा, लोगों में दहशत, अस्पताल में 1 ही डॉक्टर

दिनेशपुर (महेंद्र पाल सिंह) : शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के घर से मात्र 8 किलोमीटर दूर दिनेशपुर के सरकारी अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है…वहीं इन दिनों अस्पताल परिसर में चमगादड़ों का कब्जा है। दिनेशपुर का अस्पताल सुविधा विहीन है। एक ओर पीने के पानी में टंकी पर गंदगी नजर आ रही है तो वहीं अस्पताल परिसर के मार्ग पर पक्षी मरा पड़ा हुआ था। स्वच्छता का ध्यान नहीं ऱखा जा रहा है। साथ ही मरीजों के खड़े होने की जगह के ऊपर लगे हुए पेड़ों में चमगादड़ लटक रहे हैं और कर्मचारियों के आवास क्षेत्र तथा पूरे अस्पताल परिसर में लगे पेड़ों पर बड़े-बड़े चमगादड़ों ने कब्जा कर रखा है। इन पक्षियों से निकलने वाला मल भी अस्पताल परिसर के अंदर ही पड़ा हुआ है। वहीं दिनेशपुर के सरकारी अस्पताल में तीन डॉक्टरों के पद हैं लेकिन वर्तमान में एक ही डॉक्टर अस्पताल में कार्यरत हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अस्पताल का उच्चीकरण किया था- कांग्रेस नेता

वहीं इस मामले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जे.एन सरकार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अस्पताल का उच्चीकरण किया था और तीन डॉक्टरों की नियुक्ति की गई थी लेकिन वर्तमान में एक ही डॉक्टर दिनेशपुर  के अस्पताल में कार्यरत है। लगभग सवा लाख की आबादी दिनेशपुर तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की इस साल से जुड़ी है लेकिन सुविधाएं नाम मात्र को ही हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने की सरकार से मांग

वही भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हिमांशु सरकार ने कहा कि चमगादड़़ों को हटाने के लिए उनके द्वारा पेड़ों की छटाई करवाई गई थी लेकिन चमगादड़ फिर वही आ जाते हैं। दिनेशपुर के अस्पताल में डॉक्टरों की कमी लगातार बनी हुई है तथा वह मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि गदरपुर दिनेशपुर के अस्पताल में महिलाओं के डॉक्टर तथा अन्य डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति करें।

अस्पताल परिसर में चमगादड़ों का कब्जा है

वहीं रेड क्रॉस सोसाइटी के स्वयंसेवक भोला शर्मा ने कहा कि अस्पताल परिसर में चमगादड़ों का कब्जा है जिस पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। साथ ही गदरपुर के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि मीडिया द्वारा दिखाए गए दृश्य में जो चमगादड़ दिख रहे हैं उनकी प्रजाति का निर्धारण वीडियो से संभव नहीं है लेकिन कोरोनावायरस से संबंध जोड़ने की भी आवश्यकता नहीं है। पूरे भारत वर्ष में चमगादड़ों से पुराना वायरस इंसानों में फैलने का कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया है तथा इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।

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