highlightTehri Garhwal

उत्तराखंड : सेठों का गांव हुआ वीरान, लेकिन गांव में आज भी विराजमान ‘नरसिंह देवता’

टिहरी (हर्षमनी उनियाल) : घनसाली विधानसभा के गनगर गांव में आजकल रौनक लौट आयी हुई है। सालों से वीरान इस गाँव की चहल पहल का एक मात्र सहारा बने हुए हैं. इस गाँव के आराध्य देव नरसिंह देवता हैं। आपने अक्सर इस बात को अखबारों में पढ़ा होगा कि देवता भी अब गाँव से पलायन करने लगे हैं लेकिन गनगर गांव में विराजमान नरसिंह देवता एक ऐसे शक्तिपीठ हैं जिनके लिए उनके भक्तों द्वारा भले ही बहेड़ी गाँव में एक बढ़िया मंदिर बनाया गया है लेकिन वह आज भी वहीं उसी पुरानी स्थल पर ठीक उसी तरह विराजमान हैं जैसे आज से पहले थे।

सेठों के गाँव के नाम से जाने-जाने वाला ये गांव आज हो गया वीरान

गांव की लोगों की मानें तो इस गाँव की सभ्यता 600 साल पुरानी है लेकिन पलायन की मार से यह गाँव भी नहीं बच सका। कभी सेठों के गाँव के नाम से जाने-जाने वाला ये गांव वीरान हो गया था लेकिन जो नही बदला वो है यहाँ के आराध्य देव नरसिंह देवता एवं उनकी कृपा दृष्टि, जिसने लोगों को उनकी खुशहाली के लिए अपना पूरा साथ और आशीर्वाद दिया लेकिन वह अपने आप यहां से नहीं हिले। उनकी शक्ति और लोगों की उनमें भक्ति तथा अटूट आस्था और विश्वास का ही परिणाम है कि आज जब मंदिर समिति और सेवादल से जुड़े लोगों ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का आयोजन किया तो देश विदेशों से लोगों की भीड़ उमड़ आयी।

Breaking uttarakhand news6 दिसंबर से 10 दिसंबर तक आयोजित किये गए प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर समिति के अध्यक्ष कमलेश्वर प्रसाद जोशी एवं उनकी धर्मपत्नी तथा उपाध्यक्ष प्यारे लाल जोशी, संयोजक प्रशांत जोशी, सचिव किशन दत्त जोशी, कोषाध्यक्ष हरीश जोशी, सह सचिव राजेन्द्र जोशी अन्य सक्रिय सदस्यों में क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रभात जोशी, विजयराम जोशी, रमेश जोशी, शंकर जोशी, लक्ष्मी प्रसाद जोशी, विनोद प्रसाद जोशी तथा अन्य ग्रामीणों जिसमे सभी उम्र के लोगों और दूर दराज से आने वाली ध्यानियों एवम उनके परिवारजनों ने पूरी कोशिश की।

Breaking uttarakhand newsसेठों के नाम से जाने जाने वाला ये गाँव आज भले ही पलायन की मार से खाली है लेकिन मंदिर समिति और मंदिर सेवादल से जुड़े लोगों का कहना है कि अपने आराध्य देव नरसिंह देवता की पूजन कार्यक्रम से वह लोगों को जोड़कर फिर से गांव को आबाद करने की अलख जगाई है औऱ इसे एक बहुत बड़ा सराहनीय कदम बताया। इसकी प्रशंसा हर कोई कर रहा है।

इस देवता की अनुकंपा इस गाँव के ग्रामीणों, भक्तों एवं खाश तौर पर ध्यानियों पर बरसती है। कहते हैं और इस बात के कई प्रमाण देखने को मिलते हैं कि जब भी किसी ध्यानी ने मुसीबत के वक़्त अपने आराध्य को पुकारा हो उसकी मदद करने उनके आराध्य अवश्य पहुंचते हैं। सरकार के पलायन को रोकने के दावे ओर गाँव को आबाद करने के दावे भले ही कागजों में खो गए हो लेकिन इस गाँव के युवाओं और महिलाओं का जोश आज ही गाँव को बसाने के प्रयास में लगा है।

Back to top button