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अल्मोड़ा बिग ब्रेकिंग : छात्र संघ अध्यक्ष दीपक को मिली जमानत, कोर्ट से पुलिस को फटकार

Breaking uttarakhand newsअल्मोड़ा।कुमाऊं विश्‍वविद्यालय के प्रतिष्ठित अल्‍मोड़ा के एसएसजे कैंपस में सोबन सिंह जीना परिसर में हुए घटना क्रम में अध्यक्ष दीपक उप्रेती को आज जमानत मिल गई है। दीपक उप्रेती के वकील गजेंद्र मेहता ने बताया कि माननीय सीजेएम कोर्ट अल्मोड़ा ने पुलिस को दीपक उप्रेती का धारा 307 में रिमांड नहीं दिया क्योंकि कोर्ट भी मानता है कि यह 307 का अपराध नहीं बन सकता और पुलिस को फटकार भी लगाई आज माननीय डिस्ट्रिक्ट जज कोर्ट अल्मोड़ा में दीपक की जमानत की सुनवाई की और उसे जमानत मिल गई और जल्द ही दीपक जेल से बाहर होगा।

लेकिन सोचने वाली बात ये है कि आखिर पुलिस ने किसके दबाव में दीपक उप्रेती के खिलाफ धारा 307 लगाई? मित्र पुलिस इतना बड़ा खेल किसके कहने पर खेल रही है? क्या ऐसे इंसाफ होगा पढ़ने लिखने वाले छात्रों के साथ? पुलिस ने जबरन गिरफ्तार करने के लिए दीपक के ऊपर 307 धारा लगाई जिस कारण वह उसे गिरफ्तार कर सकें।

ये था मामला

बता दें कि बीती शुक्रवार को प्रथम सेमेस्टर के छात्रों के सत्यापन, विषय परिवर्तन व कक्षों में पंखे लगवाने जाने आदि मुद्दों पर एसएसजे परिसर में बवंडर हो गया था। मांगों को लेकर छात्र संघ अध्यक्ष दीपक उप्रेती समर्थकों के साथ निदेशक प्रो. पथनी से मिलने गया था। परिसर निदेशक ने समझाया कि मांगें करीब करीब पूरी कर ली गई हैं। जमीनी स्तर पर उतारने में समय लग सकता है लेकिन अमल कर लिया जाएगा। मगर छात्र नेता व साथी छात्र इस बात से संतुष्ट न हुए। नारेबाजी के बीच परिसर बंद करा दिया गया था। मुख्य कार्यालय में तालाबंदी कर छात्र संघ अध्यक्ष समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गया।

इधर परिसर निदेशक प्रो. पथनी छात्रों को समझाने के लिए धरना स्थल पर पहुंचे। इसी दौरान छात्र संघ अध्यक्ष दीपक व समर्थक छात्रों की प्रो. पथनी से तकरार हो गई। बहसबाजी के बीच छात्र संघ अध्यक्ष ने अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेलने के बाद परिसर निदेशक व वहां मौजूद इतिहास की विभागाध्यक्ष प्रो. दया पंत पर भी पेट्रोल डाल दिया। फिर आग लगाने की चेतावनी दी। आरोप था कि छात्र संघ अध्यक्ष ने साथी छात्रों को भी उकसाया।

निदेशक ने दी थी अध्यक्ष के खिलाफ तहरीर

इससे आहत परिसर निदेशक प्रो. पथनी ने बीती शाम को ही छात्र संघ अध्यक्ष के खिलाफ बदसलूकी व पेट्रोल डाल आग लगाने के लिए उकसाने का आरोप लगा तहरीर दी। शनिवार को आरोपित छात्र नेता दीपक को पुलिस ने विरोध के बीच परिसर से गिरफ्तार किया। मुकदमा दर्ज किया गया। सीओ वीर सिंह ने भी कोतवाली पहुंच बयान लिए। शाम उसका चिकित्सीय परीक्षण करा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनमोहन सिंह की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपित छात्र संघ अध्यक्ष की जमानत अर्जी खारिज कर सीजेएम ने जेल भेजने का आदेश दिया। जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया लेकिन आज उन्हें जमानत मिल गई.

जानकारों का मानना है कि बाकी धाराओं में पुलिस दीपक की गिरफ्तारी नहीं कर सकती है। अब सवाल ये है कि अगर 307 धारा जब लग ही नहीं सकती थी तो फिर क्यों लगाई गई? या कहें अधिकारियों की जानकारी का अभाव है ये? या रची जा रही थी कोई बड़ी साजिश?

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