
कहते हैं हौंसला हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है. दिल में जज्बा हो कुछ पाने का तो नमुमकिन को भी मुमकिन किया जा सकता है. औऱ ऐसा ही कर दिखाया प्रांजल पाटिल ने जो की दोनों आंखों से देख नहीं सकती लेकिन कभी भी प्रांजल ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनाया और खुद को आइएएस अधिकारी बनाकर ही ठानी. प्रांजल ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 124वीं रैंक हासिल की और उपजिलाधिकारी का पदभार संभाला.
देश की पहली दृष्टिबाधित महिला आईएएस
जी हां आपको बता दें कि महाराष्ट्र की प्रांजल पाटिल देश की पहली दृष्टिबाधित महिला आईएएस हैं। केरल कैडर की प्रांजल पाटिल ने सोमवार को तिरुवनंतपुरम में उपजिलाधिकारी का पदभार संभाला। वह एक ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती हैं जिसमें हर किसी को बिना भेदभाव के अवसर मिलें। इस दौरान प्रांजल पाटिल ने कहा कि ‘मैंने कभी हार नहीं मानी’।
प्रांजल की क्वालिफिकेशन
बता दें कि 28 साल की प्रांजल का जन्म महाराष्ट्र के उल्हासनगर में हुआ। अपनी सफलता का श्रेय वे अपने मां-पिता को देती हैं जिन्होंने हमेशा उन्हें हौंसला दिया। जानकारी दी कि प्रांजल ने जवाहर लाल विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय पर परास्नातक की औऱ फिर पीएचडी और एमफिल किया।
पेंसिल आंख में लगने से चली गई थी रोशनी
जानकारी मिली कि जब वो 6 साल की थीं तो उनकी सहपाठी ने खेल-खेल में उनकी आंख में पेंसिल मार दी थी औऱ घायल कर दिया था। डॉक्टर ने कहा था कि हो सकता है कि प्रांजल की दूसरी आंख की रोशनी भी चले जाए और हुआ ऐसा ही. कुछ दिन बाद ही उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई।
भारतीय रेलवे खाता सेवा में मिला था नौकरी का प्रस्ताव लेकिन
प्रांजल ने बताया कि 2016 में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 773वीं रैंक हासिल की थी तब उन्हें भारतीय रेलवे खाता सेवा में नौकरी का प्रस्ताव मिला लेकिन दृष्टिहीनता के कारण उन्हें नौकरी नहीं दी गई। जिस कारण वो बहुत निराश हो गई थीं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी औऱ फिर कोशिश करने की ठानी। अगले साल वह 124वीं रैंक लेकर आईं और उनकी सफलता ने सभी पूर्वागृहों को जवाब दे दिया। उन्हें प्रशिक्षण अवधि के दौरान एर्नाकुलम सहायक कलेक्टर नियुक्त किया गया है.