जानिए, इस साल शराब से कितने करोड़ ज्यादा कमाएगी सूबे की सरकार

 

देहरादून- देश को औसतन सबसे ज्यादा फौजी देने वाले राज्य उत्तराखंड के नौजवानों की रगों के जोशीले लहू को शराब से मदहोश करन का सिलसिला पिछले 16 सालों से जारी है।

हर बार शराब के खिलाफ जनता लामबंद होती है लेकिन सरकारें उतनी ही मजबूती से विरोध को दरकिनार करते हुए आबकारी का लक्ष्य बढा देती है। इस बार भी  देवभूमि उत्तराखंड में नई शराब नीति बन गई है। जो आने वाले एक जून से लागू भी हो जाएगी। हर जिले को शराब से कितना कमाना है ये भी तय हो गया है।

देहरादून जिले को सरकार ने सबसे बड़ा लक्ष्य दिया है। इस साल सरकार को शराब के धंधे से 2310 करोड़ रूपए कमाने हैं। पिछले साल सरकार ने 1905 करोड़ की कमाई का लक्ष्य रखा था। जिसमे अकेले देहरादून जिले ने शराब बेचकर सरकार की झोली में 321 करोड़ दिए थे। जबकि इस साल देहरादून के लिए 422 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सूत्रों की बात पर यकीन किया जाए तो देहरादून के बाद हरिद्वार जिले को इस बार 282 करोड़ के राजस्व दिया गया है। वहीं उधमसिंह नगर को 136 करोड़ रूपए शराब के धंधे से कमाने हैं। नैनीताल को 219 करोड़ का तारगेट मिला है जबकि पौड़ी जिले को 71 करोड़ और टिहरी को 56 करोड़ रूपए शराब से कमा कर देने हैं। वहीं चमोली जिले को 42 करोड़ और उत्तरकाशी को 27 करोड़ रुपए शराब से जुटाने हैं। रुद्रपुर को अकेले 23 करोड़ रूपए शराब से कमाने हैं।

सरकार के नए फरमान पर अमल करने के लिए आबकारी महकमे के अधिकारी तय राजस्व को जुटाने के लिए मत्थापच्ची में जुटे हुए हैं। जबकि कहने वाले कह रहे है कि, भैया कहां तो किस्तों में शराबबंदी की बात की जा रही थी और कहां शराब से कमाई का तारगेट पिछले साल के मुकाबले बढ़ा दिया गया है। बहरहाल इस बार भाजपा सरकार कांग्रेस सरकार के मुकाबले शराब के धंधे से 405 करोड़ रुपए ज्यादा कमाएगी।

 

 

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