उत्तराखंड : जवान खुद नहीं सुरक्षित, जान जोखिम में डालकर चीन सीमा तक पहुंचने को मजबूर

पिथौरागढ़ (मोहम्मद यासीन) : उत्तराखण्ड की चीन से लगती सीमा के निकट नदियों में लकड़ी के अस्थाई पुल हैं, जिससे गुजरकर न केवल स्थानीय लोग बल्कि राष्ट्र सुरक्षा में लगी भारतीय फौज भी जाती है।

खबरों में अक्सर आपने देखा होगा की हमारा पड़ोसी देश चीन भारत की सीमाओं तक सड़क ले आया है लेकिन आपने भारत के हिस्से की सीमाओं तक जाने वाली सड़कों के हाल कभी नहीं देखे होंगे। आज हम आपको चीन से लगी भारतीय सीमा में जोहार वैली की वो तस्वीरें दिखाएंगे जिन्हें देखकर आप भीसोचने पर विवश हो जाएंगे। ये जोहार वैली के 9 माइग्रेशन(प्रवासीय)गांवों को जोड़ने वाला लास्पा लकड़ी का पुल है। यहां गाड़ी का पुल न बनने की वजह से ग्रामीण, भारतीय फौज और भारत तिब्बत बॉर्डर पुलिस(आई.टी.बी.पी.)के जवान जान हथेली मे रखकर नदी पार करते हैं। इसी मार्ग से फौज अपना रसद और हथियार लेकर जाती है, यही वो मार्ग है जहां से ग्रामीण भी अपने मवेशी को नदी पार कराते हैं और कई बार हादसे के शिकार होते हैं ।

मुनस्यारी मिलम पैदल मार्ग पर लास्पा गाड़ी का पुल बर्फबारी के दौरान टूटने से अभी तक नहीं बन पाया है। ग्रामीण और मवेशी अपनी जान हथेली मे रखकर हर दिन पुल पार करने को मजबूर हैं। गर्मी बढ़ने की वजह से इनदिनों हिमालय पिघल रहे हैं और नदियों में पानी का तेज बहाव है। जोहर वैली के मिलम, बुरफू, बिल्जू, टोला, लास्पा, मरतोली, पाछू, गनघर मापा और ल्वा गॉव को जाने वाले इस रास्ते में आगे भारत चीन सीमा है । यही सीमा में भारतीय फौज की सप्लाई लाइन भी है। ग्रामीण भी अपनी व्यथा बयां कर रहे हैं।

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